झाबुआ के श्री ऋषभदेव बावन जिनालय के उपाश्रय में गुरुवार को प्रभु श्री पार्श्वनाथ भगवान की 200 से अधिक प्रतिमाओं का सामूहिक अष्टप्रकारी पूजन किया गया। यह पूजन आचार्य भगवंत श्री जिनसुंदर सुरिश्वर जी महाराज के शिष्य पन्यास प्रवर श्री योगरुचि विजय जी महाराज की निश्रा में पूर्ण विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। श्री संघ प्रवक्ता रिंकू रूनवाल ने बताया कि यह अनुष्ठान सुबह 9:30 बजे प्रारंभ हुआ, जिसमें झाबुआ श्रीसंघ के बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए। प्रत्येक श्रावक के सामने पाटले पर सिंहासन पर प्रभु की प्रतिमाएं विराजित थीं। विधिकारक दीपक मुथा और निखिल भंडारी ने स्तवन प्रस्तुत किए। पन्यास प्रवर श्री ने सभी प्रतिमाओं पर अभिमंत्रित वासक्षेप किया। गुरुवंदन की विधि श्रावक धर्मचंद मेहता द्वारा संपन्न कराई गई। इस अवसर पर पन्यास प्रवर श्री योगरुचि विजय जी ने प्रभु की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमारी सोच सीमित है, लेकिन परमात्मा सर्वज्ञ हैं। उनसे छोटे-मोटे संसार के सुख मांगने के बजाय ऐसा मांगो कि फिर कुछ मांगना ही न पड़े। परमात्मा में इतनी शक्ति है कि वे हमें उस मोक्ष पद तक पहुंचा सकते हैं, जहाँ जीवन का कोई प्रश्न ही शेष नहीं रहता।” उन्होंने एक अंधे भिखारी का दृष्टांत देते हुए समझाया कि कैसे उसने एक ही वरदान में अपनी आंखें, परिवार की समृद्धि और वैभव सब कुछ मांग लिया था। उन्होंने प्रेरणा दी कि भक्तों को प्रभु से सांसारिक उलझनों के बजाय संसार से मुक्ति का मार्ग मांगना चाहिए। श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता के अनुसार, पूजन के बाद सभी श्रावकों को परमात्मा की प्रतिमाएं प्रदान की गईं। इन प्रतिमाओं की स्थापना का मुहूर्त 1 फरवरी 2026 (सर्वार्थ सिद्धि योग एवं रविपुष्य नक्षत्र) है। इस शुभ मुहूर्त में सभी श्रावक अपने घरों की चौखट पर प्रभु श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ को विराजित करेंगे। श्रीसंघ के सचिव रत्नदीप सकलेचा ने बताया कि महाराज साहेब ने इस वर्ष झाबुआ श्रीसंघ में सामूहिक वर्षीतप की तपस्या का आह्वान किया है। इस संदेश के बाद कई तपस्वियों ने अपने नाम लिखवाए।


