“हम बोल-सुन नहीं सकते, लेकिन हमारी पीड़ा भी उतनी ही गहरी है, जितनी भागीरथपुरा में रहने वाले अन्य लोगों की। हमें रोज़ आरओ का पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। पहले ही हमारी आर्थिक स्थिति कमजोर है, ऊपर से हमारी दिव्यांग पेंशन भी लंबे समय से बंद है। यह क्यों बंद की गई, कोई बताने को तैयार नहीं है। ऐसे में रोज महंगा पानी खरीदकर पीना हमारे लिए बेहद मुश्किल हो गया है। कम से कम हमारे लिए आरओ पानी की व्यवस्था करा दी जाए, ताकि इस परेशानी से मुक्ति मिल सके।” यह गुहार भागीरथपुरा में रहने वाले चेतन कुमार निम और उनके साथियों (मूक-बधिर) ने सांकेतिक भाषा में वीडियो जारी कर की है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में उनके जैसे छह से अधिक दिव्यांग परिवार सहित रहते हैं। दूषित पानी का मामला सामने आने के बाद सभी बेहद चिंतित हैं और मजबूरी में रोज़ आरओ का पानी खरीदकर पी रहे हैं। इस मामले में चेतन कुमार निम ने कलेक्टर को पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा में सरकारी नलों से आने वाला पानी नाली और ड्रेनेज के पानी से मिला हुआ है, जो पीने योग्य नहीं है। इस दूषित पानी के कारण क्षेत्र में गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। अब तक लगभग 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से बीमार हैं। स्थिति दिन-प्रतिदिन भयावह होती जा रही है। पत्र में चेतन निम ने लिखा है कि वे स्वयं दिव्यांग हैं और इस कारण अत्यंत असहाय स्थिति में हैं। दूषित पानी के चलते उन्हें पीने के लिए आरओ का पानी खरीदना पड़ रहा है, जिस पर उनकी आय से कहीं अधिक खर्च हो रहा है। यह स्थिति उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद कठिन हो चुकी है। उन्होंने आशंका जताई है कि क्षेत्र में पहले ही कई लोगों की जान जा चुकी है और ऐसे में हैजा (कोलेरा) जैसी घातक बीमारी फैलने का गंभीर खतरा बना हुआ है। यह हालात अब एक प्रकार की आपदा बन चुके हैं। चेतन निम ने अपने पत्र में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि अधिनियम की धारा 8 के तहत किसी भी आपदा या आपातकालीन स्थिति में दिव्यांग व्यक्तियों की सुरक्षा एवं सहायता सरकार का दायित्व है। वहीं धारा 24 के अंतर्गत दिव्यांग व्यक्तियों को स्वास्थ्य सेवाओं तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंच प्रदान करना अनिवार्य है। कलेक्टर से यह की है मांग चेतन निम ने यह गुहार न केवल वीडियो के माध्यम से की है, बल्कि मोबाइल पर भी कलेक्टर को अपनी पीड़ा से अवगत कराया है। ये खबरें भी पढ़ें… 20 चिताएं तो मौतें 6 क्यों…दूषित पानी पर दोहरा सच इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों की संख्या 18 से बढ़कर 20 हो गई है। सरकार ने हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में सिर्फ चार मौतें होना माना है, जबकि 18 मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपए की सहायता दी जा चुकी है। प्रशासन ने परिजन को मुआवजा देने के लिए बनाई गई सूची में बुधवार को दो नए नाम जोड़े हैं।पूरी खबर पढ़ें सबसे पहले 2 बच्चों में मिले थे हैजा जैसे सिम्टम्स इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 17 लोगों की मौत हो गई है। आईसीयू में 15 मरीज एडमिट हैं, जिनमें से 2 की हालत क्रिटिकल बताई जा रही है। कुल एडमिट मरीजों की संख्या 110 है, जबकि एक हफ्ते पहले एडमिट मरीजों की संख्या 398 थी। इस बीच एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। अस्पताल के सूत्रों ने बताया है कि समय रहते बच्चों में हैजा जैसे सिम्टम्स पता चल गए, नहीं तो स्थिति कुछ और हो सकती थी।पूरी खबर पढ़ें


