मुख्यमंत्री पशुधन योजना के तहत राज्य में पशु शेड बनाने की गति काफी धीमी है। राज्य के सभी 24 जिलों में नवंबर 2023 में शेड निर्माण की योजना शुरू की गई थी। वित्तीय वर्ष 2024-24 में सभी जिले में 42,939 पशु शेड का निर्माण करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके एवज में 32,990 योजनाएं ही स्वीकृति हुईं। 16 दिसंबर 2024 तक इनमें से मात्र 16,394 योजनाएं ही पूरी हो सकी हैं। 13,739 योजनाओं पर काम चल रहा है। जबकि, कुछ शेड का निर्माण शुरू होना है। अगर इसे प्रतिशत के रूप में देखा जाए तो कुल लक्ष्य के विरुद्ध 76.83 योजनाएं ही स्वीकृत की गईं। इस तरह से लक्ष्य के विरुद्ध 38.18% योजनाएं ही दिसंबर 2024 तक पूरी हो पाई हैं। बताया जा रहा है कि राज्य में वर्ष 2024 में लगातार 79 दिनों तक चली मनरेगाकर्मियों की हड़ताल की वजह से यह योजना प्रभावित हुई और काम धीमा हो गया। पशुपालकों को मदद करना है योजना का उद्देश्य : मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना को शुरू करने का उद्देश्य किसानों व पशुपालकों के पलायन को रोकना है। योजना के माध्यम से किसानों तथा पशुपालकों को दुधारू पशुओं के साथ-साथ शूकर, बकरी, बत्तख तथा कुक्कुट पालन आदि का व्यवसाय शुरू करने के लिए यूनिट की कुल लागत की 90% तक सब्सिडी दी जाती है। मंत्री ने दिया था योजनाओं को जल्द पूरा करने का निर्देश मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने पिछले दिनों मनरेगा समेत ग्रामीण विकास विभाग के तहत चलने वाली विभिन्न योजनाओं को लेकर कड़े निर्देश दिए थे। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया था कि आम लोगों से जुड़ी हुई योजनाओं में किसी तरह की लापरवाही न हो। योजनाओं को समय पर पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। पलामू में 77.67% योजनाएं पूरीं, देवघर में मात्र 9.44% शेड का निर्माण मनरेगा के तहत पशु शेड निर्माण के मामले में देवघर जिला सबसे पीछे है। यहां लक्ष्य के हिसाब से मात्र 9.44% योजनाएं ही पूरी हो पाई हैं। देवघर में 2098 पशु शेड के निर्माण का लक्ष्य था। इसके विरुद्ध दिसंबर 2024 तक 198 योजनाएं ही पूरी हो पाई हैं। वैसे देवघर समेत चार जिले ऐसे हैं, जहां लक्ष्य के विरुद्ध 20% भी योजनाएं पूरी नहीं हो सकी हैं। जामताड़ा जिले में 1065 के लक्ष्य के विरुद्ध 149 योजनाएं ही पूरी हो पाई हैं, जो लक्ष्य का 14% है। चतरा जिले में 1841 योजना का लक्ष्य था, इसके विरुद्ध 16.62% यानि 306 योजनाएं ही पूरी हो सकी हैं। पूर्वी हिसंहभूम में 2743 के विरुद्ध 18.70% यानि 513 योजनाएं ही पूरी हो सकी हैं। इसके विपरीत राज्य के 4 जिले ऐसे हैं, जहां लक्ष्य के विरुद्ध 60% से ज्यादा काम हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा पलामू जिले में लक्ष्य के विरुद्ध 77.67%, लोहरदगा में लक्ष्य के विरुद्ध 70.88%, गुमला जिले में लक्ष्य के विरुद्ध 66.83% और हजारीबाग जिले में 64.82% योजनाएं पूरी हो गई हैं।


