बुधवार को तपस्विनी एक्सप्रेस से एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। घटना उस समय सामने आई, जब ट्रेन संख्या 18452 तपस्विनी एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर एक पर पहुंची और आरपीएफ द्वारा नियमित सतर्कता जांच की जा रही थी। इसी दौरान कोच एस-4 के शौचालय के डस्टबिन से शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी। जांच करने पर आरपीएफ कर्मियों को वहां एक जीवित नवजात मिला। सूचना मिलते ही आरपीएफ, जीआरपी और चाइल्डलाइन की टीम सक्रिय हुई और तत्काल शिशु को सुरक्षित इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल बच्चे का इलाज जारी है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। यह मामला न केवल कानून और सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि समाज के सामने मानवीय संवेदनाओं और जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आरपीएफ की सतर्कता के कारण ही नवजात की जान बच सकी। 300 से अधिक बच्चे वर्ष 2025 में आरपीएफ ने बचाए पहले भी रांची रेल मंडल के अंतर्गत ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हआरपीएफ द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत वर्ष 2025 में मानवीय प्रयासों के चलते 172 बालकों और 149 बालिकाओं को रेस्क्यू किया गया है। यह अभियान बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है।


