रांची यूनिवर्सिटी में इन दिनों डिग्री नहीं, बल्कि गलती छप रही है। जिस सर्टिफिकेट को छात्र जीवन की सबसे बड़ी पहचान माना जाता है, वही अब प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण बन गया है। िकसी में नाम बिगड़े हुए हैं, किसी में लिपि अपठनीय है और कहीं नाम की जगह डिजाइन छाप दिया गया है। परीक्षा विभाग के मामले के जानकार एक पूर्व अधिकारी बताते हैं कि आरयू का परीक्षा विभाग जब से निजी एजेंसी के हाथों में गया है, तब से उसकी कार्यसंस्कृति लगातार सवालों के घेरे में है। सेशन नियमित करने में नाकाम रहा विवि प्रशासन अब छात्रों को त्रुटिपूर्ण डिग्रियां देकर उनकी मुश्किलें बढ़ा रहा है। डिग्रियों में बड़े पैमाने पर अशुद्धियां हैं- किसी में नाम ही गलत है तो किसी में छात्र अपना नाम पढ़ ही नहीं पा रहे हैं, कहीं नाम बिगाड़ दिया गया है, तो कहीं नाम की जगह डिजाइन या अजीब-से निशान छाप दिए गए हैं। इसी सिलसिले में शहीद चौक यूनिवर्सिटी मुख्यालय पहुंचीं सुष्मिता तिरु ने बताया कि उन्हें जो डिग्री दी गई है, उसमें अंग्रेजी में नाम सही है। लेकिन हिंदी में नाम की जगह क्या लिख दिया गया है, कोई नहीं पढ़ सकता है। सुधार के लिए यूनिवर्सिटी मुख्यालय में आवेदन दिया है। लेकिन अभी तक सुधार कर डिग्री नहीं मिली है। 1. सुष्मिता तिरु: नाम की जगह बना दिया डिजाइन
2. जयचंद महतो: जयचंद से जयचा बन गए
3. विक्रम कुमार चौधरी: नाम पढ़ा नहीं जा रहा
4. दिलीप कुशवाहा: सर्टिफिकेट में कुशवाह बन गए अंग्रेजी में नाम सही, हिंदी में हुई गड़बड़ी विश्वविद्यालय द्वारा एक ही फॉरमेट में डिग्रियां दो भाषाओं हिंदी और अंग्रेजी में जारी की जाती हैं। अंग्रेजी संस्करण लगभग सही हैं, लेकिन हिंदी में भारी त्रुटियां हैं। इससे यह आशंका गहराती है कि हिंदी डेटा की एंट्री किसी अयोग्य ऑपरेटर से करवाई जा रही है। यूनिकोड या फॉन्ट कन्वर्जन की सही तकनीक नहीं अपनाई जा रही है। बड़ा सवाल… डिग्री प्रिंटिंग से पहले कोई वेरिफिकेशन या प्रूफ-रीडिंग सावधानी से नहीं की जाती है। प्रिंट होने से पहले वेरिफिकेशन या प्रूफ-रीडिंग सही ढंग से की गई होती, तो इस तरह की समस्या सामने नहीं आती। अब सुधार के लिए छात्रों को यूनिवर्सिटी मुख्यालय का चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। 4 केस स्टडी से समझें… डिग्री सर्टिफिकेट में किस तरह की हो रही गड़बड़ी क्या है परेशानी : रिम्स डेंटल कॉलेज से 2024 में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी की डिग्री प्राप्त करने वाले दिलीप कुशवाहा की डिग्री में उनका उपनाम कुशवाहा के बजाय कुशवाह दर्ज कर दिया गया है। असर : मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन में बाधा आ सकती है। सत्यापन में नाम मिसमैच दिखेगा। क्या है परेशानी : डोरंडा कॉलेज से 2024 में बीएड करने वाले विक्रम कुमार चौधरी की डिग्री में उनका नाम ऐसी भाषा और लिपि में छापा गया है जिसे पढ़ नहीं सकते हैं। अभी सुधार नहीं हुआ है। असर : सत्यापन के समय डिग्री अस्वीकार होना स्वाभाविक है। डिजिटल वेरिफिकेशन फेल हो सकता है। क्या है परेशानी : रांची विवि के सिल्ली कॉलेज से स्नातकोत्तर करने वाले जयचंद महतो की डिग्री में उनका नाम जयचंद के बजाय जयचा छापा गया है। जिससे उनकी पहचान ही बदल दी गई है। असर : नया सर्टिफिकेट पुराने शैक्षणिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा है। इससे करियर में तकनीकी बाधा आ रही है।


