जालंधर के अर्जनवाल में नाशीजीव प्रबंधन का कार्यक्रम:सीआईपीएमसी की टीम ने किसानों को दी रबी फसलों में नाशीजीव नियंत्रण की जानकारी

केंद्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र यानी सी-आईपीएमसी ने जालंधर की ओर से गांव अर्ज-नवाल, ब्लॉक आदमपुर में किसानों के लिए एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन यानी आईपीएम विषय पर दो दिवसीय मानव संसाधन विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को रबी फसलों में नाशी जीव एवं रोग प्रबंधन की आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के प्रति जागरूक करना रहा। विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान, क्षेत्र दौरा और व्यावहारिक जानकारी के माध्यम से किसानों को टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान सी-आईपीएमसी जालंधर के अधिकारी-प्रभारी डॉ. पी.सी. भारद्वाज ने किसानों को एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन की अवधारणा, उसके महत्व और आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अत्यधिक रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से पर्यावरण प्रदूषण, मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव और मिट्टी की उर्वरता में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इससे बचने के लिए सभी आईपीएम उपकरणों और जैव-गहन तकनीकों को समन्वित रूप से अपनाना आवश्यक है। किसानों को दी गई सलाह डॉ. भारद्वाज ने किसानों को सलाह दी कि कीटनाशकों का उपयोग केवल आवश्यकता के अनुसार और विवेकपूर्ण ढंग से किया जाए। उन्होंने केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (सीआईबीआरसी) द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों के प्रयोग पर विशेष जोर दिया, ताकि फसल उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन भी बना रहे। कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग के बारे में बताया सी-आईपीएमसी जालंधर के पादप संरक्षण अधिकारी श्री पवन कुमार ने कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग पर व्याख्यान दिया। उन्होंने किसानों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण जैसे दस्ताने, मास्क, सुरक्षात्मक चश्मा और एप्रन पहनने की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया। साथ ही कीटनाशकों के प्रयोग के दौरान “क्या करें” और “क्या न करें” से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। सहायक पादप संरक्षण अधिकारी श्री संजय ने एंटोमोपैथोजेनिक कवकों जैसे ट्राइकोडर्मा, ब्यूवेरिया बैसियाना और मेटाराइजियम प्रजातियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये जैविक एजेंट नाशी-जीव नियंत्रण में प्रभावी होते हैं और फसलों को प्रारंभिक अवस्था में फफूंद व बैक्टीरिया जनित रोगों से बचाने में सहायक हैं। उन्होंने बीज उपचार में ट्राइकोडर्मा और स्यूडोमोनास प्रजाति के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। एनपी-एसएस मोबाइल एप्लिकेशन की जानकारी दी गई इसके अतिरिक्त किसानों को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित एनपी-एसएस मोबाइल एप्लिकेशन की जानकारी दी गई। किसानों को समय पर नाशीजीव प्रबंधन संबंधी सूचना प्राप्त करने के लिए लॉगिन आईडी और पासवर्ड भी उपलब्ध कराए गए। राज्य कृषि विभाग के अधिकारी भी हुए शामिल इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य कृषि विभाग के अधिकारी भी सक्रिय रूप से शामिल हुए। इनमें कृषि विस्तार अधिकारी श्री राजेन्द्र कुमार, श्री जितेन्द्र कुमार, कृषि विकास अधिकारी श्री अमरिक सिंह, एएसआई श्री अमृतपाल तथा क्षेत्र अधिकारी श्री धरमपाल सिंह शामिल थे। अधिकारियों ने किसानों को सरकारी कृषि योजनाओं की जानकारी दी और प्रशिक्षण से अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। किसानों ने सी-आईपीएमसी की टीम का आभार किया व्यक्त कार्यक्रम के अंत में किसानों ने सी-आईपीएमसी जालंधर की टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम सतत और लाभकारी खेती को बढ़ावा देने में अत्यंत उपयोगी हैं। किसानों ने भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।

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