भागीरथपुरा क्षेत्र में 36 घंटे में 5 हजार से ज्यादा घरों की जांच की गई है। 463 घरों में कम से कम एक संक्रमित मिला है। कुछ घरों में एक से अधिक संक्रमित मिले। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इस दौरान 25 हजार 100 लोगों से बात की। सर्वे में साफ हुआ कि संक्रमण किसी एक गली या क्लस्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरा भागीरथपुरा प्रभावित रहा। सर्विलांस टीम का कहना है अब नए केस की संख्या में लगातार कमी देखी जा रही है। सभी केस की जिओ मैपिंग की गई, जिससे स्पष्ट हुआ कि केस पूरे क्षेत्र में फैले हुए हैं, न कि किसी एक जगह केंद्रित। नेशनल हेल्थ मिशन के स्टेट सर्विलांस ऑफिसर डॉ. अश्विन भागवत ने बताया कि कई मरीज इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं, जबकि कुछ का इलाज जारी है। जिओ मैपिंग के जरिए मरीजों की पहचान की गई। हर घर में ओआरएस और जिंक टैबलेट की किट पहुंचाई गई और पॉइंट ऑफ यूज क्लोरिनेशन के लिए क्लोरिन की दवाएं भी दी गईं। दूसरे चरण में रैपिड सर्वे सर्वे का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा, जिसे एपिडिमियोलॉजिकल फाइंडिंग कहा जाता है। इसमें रैपिड सर्वे और जिओ मैपिंग से मिले डाटा का गहराई से विश्लेषण किया जाएगा। देखा जाएगा कि बीमारी का मूल स्रोत क्या रहा, संक्रमण किन कारणों से फैला, किन परिस्थितियों में ज्यादा केस आए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए किन ठोस उपायों की जरूरत है। इसी विश्लेषण के आधार पर आगे की स्वास्थ्य रणनीति तय की जाएगी। उधर, फील्ड रिपोर्ट में साफ हुआ कि अधिकतर रिपीट केस उन्हीं घरों से आ रहे हैं, जहां पहले संक्रमण हो चुका है। यानी बीमारी नए इलाकों में फैलने के बजाय पुराने मरीजों में ही लौट रही है। रोज 30 हजार लीटर साफ पानी लोगों तक पहुंचा रहे भागीरथपुरा में रहवासी एक-दूसरे की मदद कर रहे। यादव कंपाउंड निवासी विजेंद्र यादव रोज 30 हजार लीटर साफ पानी लोगों तक पहुंचा रहे। पानी साफ करने के लिए प्लांट उनके पास पहले से ही था। पहला चरण : समय पर पहचान और इलाज घर-घर सर्वे कर मरीजों की पहचान की गई। उपचाररत, ठीक हो चुके और नए मरीजों पर ध्यान दिया गया। ओपीडी इलाज और जरूरत पड़ने पर रेफरल की व्यवस्था की गई। दूसरा चरण : दूषित पानी पर रोक, साफ पेयजल दूषित पानी की आपूर्ति को रोका गया और सुरक्षित पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। क्लोरिनेशन के जरिए पानी को सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया। तीसरा चरण : रोकथाम और जागरूकता हर घर में ओआरएस, जिंक टैबलेट और क्लोरिन की दवाएं पहुंचाई गईं। लोगों को इनके सही उपयोग की जानकारी दी गई। 10 अभी भी आईसीयू में प्रभावित क्षेत्र में 1750 घरों में किट वितरित की गईं, जिससे करीब 6245 लोग लाभान्वित हुए। हर किट में ओआरएस के 10 पैकेट और जिंक की 30 गोलियां शामिल रहीं। गुरुवार को डायरिया के 23 मरीज ओपीडी पहुंचे, जिनमें से 6 को रैफर किया गया। अब तक 446 मरीज अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं, 396 डिस्चार्ज हुए हैं। फिलहाल 50 मरीज भर्ती हैं, जिनमें 10 आईसीयू में हैं। 2300 से अधिक सरकारी बोरवेल्स का क्लोरिनेशन भागीरथपुरा में दो दिन में 2300 से अधिक सरकारी बोरिंग का क्लोरिनेशन किया गया है। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया, 2250 से अधिक बोरवेल्स की जियो-ट्रैकिंग पूरी की है। 50 से अधिक क्लोरीन सैंपल लिए हैं। दवाइयां बीच में छोड़ने से संक्रमण दोबारा फैला ओपीडी या अस्पताल से डिस्चार्ज के बाद दी गई दवाइयों का पूरा कोर्स करना जरूरी है। एंटीबायोटिक 5 से 7 दिन और जिंक टैबलेट 14 दिन तक लेनी होती है। दवाइयां बीच में छोड़ने से संक्रमण दोबारा उभर रहा है। मरीज उबला हुआ पानी पिएं, क्लोरिनेटेड पानी का उपयोग करें और स्वास्थ्य सलाह का पालन करें।
डॉ. माधव प्रसाद हासानी, सीएमएचओ


