इंदौर की 650 किमी लाइनें जर्जर:भागीरथपुरा ही नहीं, शहर के हर कोने की पेयजल पाइप-लाइन में लीकेज

शहर की पूरी पेयजल वितरण व्यवस्था ही खतरनाक मोड पर है। अमृत-2 के लिए की गई निगम की स्टडी में ही सामने आया है कि शहर के कई इलाकों में 50 साल से ज्यादा पुरानी लाइनें हैं। कुल 3500 किमी की पेयजल पाइप लाइन में से 650 किमी की लाइन जर्जर हो चुकी है। लाइन लॉस का 40 फीसदी हिस्सा भी शहर के भीतर हो रहा है। यानी लाइनों में लीकेज व सीपेज भी है। हद ये है कि वितरण की व्यवस्था अकुशल लोगों के पास है। नर्मदा प्रोजेक्ट के साथ पीएचई का 10 फीसदी स्टाफ ही कुशल है। पूरी व्यवस्था के लिए 32 इंजीनियरों की जरूरत है, वर्तमान में मात्र 4 इंजीनियर बचे हैं। टंकी व मैदानी स्तर पर तकनीकी स्टाफ भी 20 फीसदी ही बचा है। यह व्यवस्था भी मस्टर कर्मियों और एजेंसियों के हवाले है। अफसरों का कहना है, 15 से 17% लाइन लासेस होता है। इसमें 40% से ज्यादा नुकसान वितरण लाइनों से होता है। जाहिर है, लाइनों में लीकेज है। इन्हीं लीकेजेस से पानी को दूषित करने वाले तत्व मिलते हैं। इन क्षेत्रों में दिक्कत ज्यादा- जूनी इंदौर, जूना रिसाला, मिल क्षेत्र, जबरन कॉलोनी, आजाद नगर, मूसाखेड़ी, भागीरथपुरा, लाबरिया भेरू, चंदननगर, बाणगंगा क्षेत्र में कई जगह मिक्स सप्लाय है। आए दिन लाइन में लीकेज होते हैं। इसलिए दूषित पानी के लिए हॉट स्पॉट बनते जा रहे हैं। इंदौर का पानी पुरानी लाइनें बंद नहीं की कई क्षेत्रों में दोहरी लाइनें यानी नई व पुरानी दोनों लाइनों से वितरण जारी है। पुरानी लाइनों को नई से जोड़ दिया गया। पुरानी लाइनों के कनेक्शन भी नई पर शिफ्ट नहीं किए। 20 से 30 फीसदी कनेक्शन शिफ्ट नहीं हैं। खाली लाइनों में लीकेज
शहर में एक दिन छोड़ कर पानी दिया जाता है। सप्लाय के बाद 30 से 40 घंटे लाइन खाली रहती है। कई जगह लाइनों के आसपास बनी सीवरेज लाइनें हैं। लाइनों में बनने वाला वेक्यूम इनका गंदा पानी खींच लेता है। नर्मदा लाइन बोरिंग से जोड़ी कम प्रेशर से पानी आने की शिकायत पर कई जगह जनप्रतिनिधियों ने बोरिंग कराकर उनका नर्मदा लाइन से कनेक्शन करा दिया है। कुछ स्थानों पर संपवेल बना कर वितरण हो रहा है। बोरिंग खराब होने पर नर्मदा का पानी भी दूषित हो रहा है। प्रमुख चुनौती – समन्वय इस पूरी व्यवस्था में सबसे बड़ी चुनौती विभागों में समन्वय की है। नगर निगम में भी सीवरेज और नर्मदा प्रोजेक्ट अलग-अलग विभाग है। रोड, सीवरेज, पानी, ब्रिज व अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के काम चलते रहते है। इससे भी लाइनें टूट फूट रही है।

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