कान्हा नेशनल पार्क समेत बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिले में पदस्थ वन अधिकारियों और वनकर्मियों को अब नक्सल भत्ता नहीं मिल पाएगा। क्योंकि नक्सल भत्ता दिए जाने के सरकार के निर्देश से लेकर प्रस्ताव तैयार करने और मंजूरी के लिए अंतिम टेबल पर पहुंचने से पहले ही मप्र नक्सल मुक्त हो गया है। वन विभाग खुद मुख्यमंत्री के पास है, उन्होंने 20 जून 2025 को वन विभाग के कामकाज की समीक्षा बैठक की थी। इसी बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे, नक्सल प्रभावित इलाकों में पदस्थापना वाले वन अधिकारियों और कर्मचारियों को पौष्टिक आहार भत्ता एवं विशेष भत्ता आदि देकर उनका हौसला बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही वनों की सुरक्षा को लेकर उल्लेखनीय काम करने वाले वनकर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन भी दिया जाएगा। एसीएस ने टीप के साथ वापस भेजी फाइल- अब तो मप्र नक्सल मुक्त है सीएम मोहन यादव ने तत्कालीन वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव को निर्देश दिए थे कि जल्द ही यह दोनों प्रस्ताव तैयार कर शासन को भिजवाएं। असीम जुलाई 2025 में रिटायर्ड हो गए। नए बन बल प्रमुख विजय कुमार अंबाड़े ने अक्टूबर माह में प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भिजवाया। दिसंबर महीने के आखिर में यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए वन विभाग के एसीएस अशोक बर्णवाल की टेबल पर पहुंचा। तो एसीएस ने इस टीप के साथ फाइल वापस लौटा दी कि मप्र अब पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है, इसलिए अब जब कोई इलाका नक्सल प्रभावित है ही नहीं तो इसके नाम पर अतिरिक्त भत्ते की कोई जरूरत ही नहीं हैं। गौरतलब है कि 11 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव अंतिम दो नक्सलियों को सरेंडर के बाद मप्र को पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित कर दिया था। अतिरिक्त नक्सल भत्ता… गौरतलब है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात पुलिस कर्मियों को अतिरिक्त नक्सल भत्ता मिलता है। इसी आधार पर पिछले कई वर्षों से वन कर्मचारी संघ लंबे समय से बालाघाट, मंडला, डिंडौरी में पदस्थापना किए जाने पर अतिरिक्त नक्सल भत्ते की मांग करते आ रहे थे। मासिक वेतन के अतिरिक्त देना था भत्ता, सूची भी तैयार हो गई थी… राज्य शासन के निर्देश पर ही मप्र वन विभाग ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, वन क्षेत्रों और कान्हा टाइगर रिजर्व में पदस्थ वनपालों को 3500 रुपए महीना (सालाना 42 हजार) और वनरक्षकों को 2700 रुपए प्रति महीना (सालाना 32 हजार 400) अतिरिक्त नक्सल भत्ता देने का प्रस्ताव तैयार किया था। यह भत्ता मासिक वेतन के अतिरिक्त देना था। 250 से अधिक वन कर्मियों को पात्र मानकर सूची तैयार कर ली गई थी।


