भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की ओर से पुणे के ‘यशदा’ संस्थान में आदर्श महिला हितैषी ग्राम पंचायत की सर्वोत्तम प्रथाओं पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला (8-9 जनवरी) का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में मध्य प्रदेश से कुल 19 प्रतिनिधियों का चयन किया गया है, जिसमें झाबुआ और आलीराजपुर जिलों के प्रतिनिधि प्रमुखता से शामिल हैं। झाबुआ और आलीराजपुर की टीम अपनी विशेष कार्यशैली के कारण चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इन आदिवासी बहुल जिलों के प्रतिनिधियों ने जमीनी स्तर पर ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। राष्ट्रीय कार्यशाला में झाबुआ की सक्रिय सहभागिता झाबुआ जिले से करवड़ के सरपंच विकास गामड़ और पेटलावद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गौरव जैन कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। इसी तरह, आलीराजपुर जिले से कवथू की सरपंच सीमा निगवाल और मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रिया काध ग्रामीण सशक्तिकरण के अपने अनुभवों को साझा कर रही हैं। सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की प्रस्तुति पर फोकस यह कार्यशाला झाबुआ और आलीराजपुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों के लिए गर्व का क्षण है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि इन जिलों में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन किस प्रकार प्रभावी ढंग से किया गया, उसे अन्य राज्यों के विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत किया जाए। प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि यह कार्यशाला उनके लिए एक बड़ा अवसर है। वे यहाँ न केवल अपने जिलों के सफल प्रयोग साझा कर रहे हैं, बल्कि अन्य राज्यों के बेहतरीन ‘पंचायत मॉडल’ को भी समझ रहे हैं। समापन बाद मास्टर ट्रेनर बनकर लौटेंगे प्रतिनिधि कार्यशाला के समापन के बाद, ये प्रतिनिधि केवल सहभागी बनकर नहीं, बल्कि ‘मास्टर ट्रेनर’ बनकर वापस लौटेंगे। इसका सीधा लाभ झाबुआ और आलीराजपुर की जनता को मिलेगा, जिससे पंचायत राज ढांचे को अधिक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने में मदद मिलेगी। इसमें ग्रामीण विकास में आधुनिक तकनीक का उपयोग और देश के अन्य राज्यों के सफल मॉडलों को मध्य प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार लागू करना शामिल है।


