खंडवा कलेक्टर ने खेत तालाबों को जांचने 35 टीमें लगाईं:सरकारी जमीन पर मिट्टी खुदाई को तालाब बता दिया; जो हितग्राही, वह अनजान

खंडवा जिले में जल संरक्षण को लेकर राष्ट्रपति से अवॉर्ड मिल चुका है लेकिन सवाल उठने के बाद राज्य स्तरीय टीम जांच करना पड़ गया। उक्त जांच का प्रतिवेदन फिलहाल शासन के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुआ है। इसी बीच खंडवा कलेक्टर ने भी खेत तालाबों की जांच के लिए 35 टीमों को मैदान में उतार दिया है। पहले दिन जांच दलों ने पाया कि अधिकांश जगह खेत तालाब के काम अधूरे है, और भुगतान हो गया हैं। खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने प्रत्येक जनपद पंचायत में कलस्टर स्तर पर जांच दलों का गठन किया है। इनमें जांच दल का नेतृत्व कृषि विस्तार अधिकारी और जल संसाधन सहित अन्य विभाग के इंजीनियर को सौंपा है। पंचायत और आरईएस के इंजीनियरों को अपने कार्यस्थल की बजाय अन्य जनपद पंचायत के कलस्टर में बतौर जांच दल सदस्य शामिल किया गया हैं। इस संबंध में बुधवार को आदेश जारी हुए, हालांकि गुरुवार देर शाम तक जांच दलों को खेत तालाबों की लिस्ट सौंपी गई। लेकिन कुछ टीमों ने सोर्स के माध्यम से लिस्ट निकाली और गुरुवार को ही मौके पर पहुंच गई। अवैध खनन की जगह को तालाब बता दिया
हरसूद जनपद पंचायत के ग्राम शाहपुरा माल पहुंची टीम को खेत तालाब में बड़ा भ्रष्टाचार देखने को मिला। यहां ग्राम पंचायत ने जहां खेत तालाब का निर्माण होना बताया है, वहां पाया गया कि मिट्टी के अवैध खनन के बाद गड्ढा हो गया था। जांच में सामने आया कि उक्त जमीन सरकारी है और रेलवे किनारे है। इस जमीन पर ग्रामीण लोग खनन करके मकान निर्माण के दौरान नींव भरने के लिए मुरूम ले जाते है। जिस कारण गड्ढा हो गया, पंचायत ने किसान भगवान पिता भागीरथ को हितग्राही बताकर खेत तालाब की राशि निकाल ली। हितग्राही भगवान को जांच के दौरान पता चला कि उसके नाम से तालाब खुद गया और पैसा भी निकल गया। काम अधूरे, बिना मूल्यांकन के भुगतान नहीं होता है
मनरेगा स्कीम और खासकर, जल संरक्षण को लेकर किए गए कामों में हुए भ्रष्टाचार ने कई सवाल खड़े कर दिए है। पंचायत विभाग में किसी भी योजना के तहत पहले मूल्यांकन होता है, उसके बाद राशि निकाली जाती है। यानी सरपंच-सचिव यदि काम दर्शाते है तो इंजीनियर को मूल्यांकन करना होता है। इंजीनियर की मूल्यांकन रिपोर्ट के बाद ही किए गए कार्य की राशि निकाली जाती है। यहां तक सुपरविजन को पूरा जिम्मा जनपद सीईओ का होता है। भारी भ्रष्टाचार ने पंचायत विभाग की पूरी प्रणाली पर सवाल उठा दिए है। अब देखना होगा कि कलेक्टर क्या एक्शन ले पाते है। जनपद स्तर पर क्लस्टरों में बने जांच दल यह खबर भी पढ़ें
2 करोड़ का राष्ट्रपति अवॉर्ड…409 करोड़ का खर्च जल संचयन जन भागीदारी अभियान में हुए फर्जीवाड़े की पर्तें एक के बाद एक खुलती जा रही हैं। राष्ट्रपति से अवॉर्ड लेने वाले खंडवा कलेक्टर और सीईओ दैनिक भास्कर डिजिटल के खुलासे के बाद सवालों में घिरे हुए हैं। शासन स्तर से दो अलग-अलग कमेटियां जांच कर रही हैं। पूरी खबर पढ़ें

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