वाराणसी में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की जमानत मिल गई है। जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की। इसके बाद पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को 50-50 हजार दो जमानतदार और बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया। वहीं देवरिया केस में जमानत मिलने पर रिहा होंगे। फिलहाल अभी अमिताभ ठाकुर जेल में नहीं है। वह अभी मेडिकल पर है और अपना इलाज करा रहे है। वारंट ‘बी’ जारी होने के बाद पुलिस ने 19 दिसंबर को अमिताभ ठाकुर को देवरिया जेल से लाकर प्रभारी विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजीव मुकुल पांडेय की अदालत में पेश किया। न्यायिक रिमांड बनने के बाद पुलिस उन्हें वापस लेकर देवरिया चली गई, इधर उनके वकील ने याचिका दायर कर जमानत मांगी है। इसके बाद जमानत अर्जी पर अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कृष्ण कुमार की अदालत ने 22 दिसंबर को अमिताभ ठाकुर की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। फिर जिला जज की कोर्ट में दायर याचिका बनारस बार एसोसिएशन चुनाव के कारण टल गई थी । अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी पर चौक थाने में दर्ज है केस
वीडीए के मानद सदस्य अंबरीष सिंह भोला ने नौ दिसंबर को चौक थाना में अमिताभ ठाकुर के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि 30 नवंबर को अमिताभ ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें बहुचर्चित कफ सीरप मामले में बिना किसी साक्ष्य के उनकी संलिप्तता का आरोप लगाया गया। बताया गया कि इस वीडियो में भ्रामक और गलत तथ्यों का प्रचार किया गया, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर आघात पहुंचा। इस मामले में पुलिस ने अमिताभ ठाकुर, उनकी पत्नी डा. नूतन ठाकुर और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। अदालत द्वारा मामले में वारंट ‘बी’ जारी होने के बाद पुलिस ने 19 दिसंबर को अमिताभ ठाकुर को देवरिया जेल से लाकर प्रभारी विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजीव मुकुल पांडेय की अदालत में पेश किया था। जमानत अर्जी पर सुनवाई नही हो सकी थी। 23 दिसंबर को जमानत अर्जी दाखिल की गई थी
अमिताभ ठाकुर की ओर से 23 दिसंबर को जिला जज की अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की गई, जिस पर सुनवाई के लिए अदालत ने दो जनवरी की तिथि निर्धारित की थी। हालांकि, बनारस बार एसोसिएशन चुनाव के कारण सुनवाई टल गई और अब यह मामला पांच जनवरी को फिर से सुना जाएगा। इस मामले में अमिताभ ठाकुर की जमानत अर्जी पर सुनवाई की प्रतीक्षा की जा रही है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि उन्हें जमानत मिलती है या नहीं। इस बीच, उनके समर्थक और विरोधी दोनों ही इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। यह मामला न केवल अमिताभ ठाकुर के लिए बल्कि उनके परिवार और समर्थकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।


