राजधानी में लगातार बढ़ रहे अपराध पर नियंत्रण के लिए वरीय अधिकारियों ने पीसीआर व पेट्रोलिंग गाड़ी को एक्टिव किया है। सभी 45 पीसीआर को मूवमेंट बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। वरीय अधिकारियों ने इसकी मॉनिटरिंग की भी व्यवस्था की है। इसके मद्देनज़र सभी 45 पीसीआर में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) इंस्टॉल कर दिया गया है। अब पीसीआर कहाँ खड़ी है, घटना की सूचना मिलने के बाद उसने कितनी देर बाद मूव किया, किस गति से गई, उसकी लोकेशन कहाँ है, इसकी पूरी जानकारी कंट्रोल रूम सहित पुलिस अधिकारियों को रहेगी। इसके लिए कंट्रोल रूम में एक टीम को तैनात किया गया है, जो अलग-अलग 3 शिफ्टों में ड्यूटी कर रही है। पीसीआर में इंस्टॉल्ड जीपीएस का एक्सेस एसएसपी व एसपी के पास भी होगा ताकि वह एक क्लिक में अपने मोबाइल पर उसकी लोकेशन व मूवमेंट को देख सकें। इसके लिए टेक्नीशियन ने तैयारी शुरू कर दी है। क्यों पड़ी ज़रूरत…क्या होगा फ़ायदा फ़ायदा: ट्रैक होगा रियल-टाइम लोकेशन, इमरजेंसी कॉल पर सबसे नज़दीकी पीसीआर को तुरंत मौके पर भेजने में मिलेगी मदद। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की आसानी से निगरानी की जा सकेगी, पीसीआर की बढ़ेगी जवाबदेही। आराम करने के बजाए लगातार मूव करेगी पीसीआर, अपराध पर लगेगी लगाम। सभी जीपीएस फंक्शनल पीसीआर में जीपीएस इंस्टॉल किया गया है। सभी जीपीएस फंक्शनल हो गए हैं। एसएसपी व एसपी तक जीपीएस का एक्सेस होगा ताकि पीसीआर की लोकेशन देखी जा सके। इसके लिए टेक्नीशियन से मदद ली जा रही है। -राकेश सिंह, सीसीआर प्रभारी सह ट्रैफिक एसपी ऐसे काम करता है जीपीएस जीपीएस एक डिवाइस है, जिसे वाहन में फिट किया जाता है। इसमें एक सिम लगा रहता है, जो मोबाइल फोन में लगे सिम की तरह होता है। मोबाइल में लगे सिम से बातें होती हैं और इसमें लगे सिम से सूचनाएँ प्राप्त होंगी। इससे मोबाइल फोन या फिर लैपटॉप का नेटवर्क जुड़ा रहता है


