छतरपुर जिले में पड़ रही कड़ाके की ठंड का असर अब सीधे स्कूली पढ़ाई पर दिखने लगा है। जिले के कई सरकारी स्कूलों में हालात ऐसे रहे कि दोपहर 12 बजे तक एक भी बच्चा स्कूल नहीं पहुंचा। सुबह तय समय पर स्कूल खुले, घंटियां भी बजीं, लेकिन कक्षाएं पूरी तरह खाली रहीं। बच्चों के न आने से शिक्षक स्कूल परिसर के बाहर धूप सेंकते नजर आए। प्राथमिक शाला रावसागर में पूरी तरह शून्य उपस्थिति शहर की प्राथमिक शाला रावसागर में भी यही स्थिति देखने को मिली। यहां दोपहर 12 बजे तक एक भी बच्चा स्कूल नहीं आया। स्कूल की सहायक शिक्षक नीलम द्विवेदी ने बताया कि स्कूल में कुल 96 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन उनमें से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि सुबह दो बच्चे स्कूल आए थे, जिन्हें अन्य बच्चों को घर से बुलाने भेजा गया। जब वे वापस लौटे तो बताया कि बाकी बच्चे ठंड की वजह से स्कूल आने को तैयार नहीं हैं। सर्द हवा और कम तापमान बना बड़ी वजह सुबह से चली सर्द हवाओं और कम तापमान के कारण अभिभावकों ने बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया। इसका असर खासकर नर्सरी, प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में साफ नजर आया, जहां उपस्थिति लगभग शून्य रही। कई स्कूलों में शिक्षक समय पर पहुंचे, रजिस्टर में अपनी हाजिरी लगाई और बच्चों का इंतजार करते रहे, लेकिन दोपहर तक भी हालात नहीं बदले। घंटियां तो बजीं, लेकिन क्लासरूम खाली रहे। शिक्षकों ने समय बदलने या अवकाश की जरूरत बताई शिक्षकों का कहना है कि अत्यधिक ठंड के कारण बच्चे स्कूल नहीं आ पा रहे हैं। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे रोजाना समय पर स्कूल पहुंचते हैं, लेकिन छोटे बच्चों के लिए सुबह की ठंड में आना मुश्किल हो रहा है। कुछ शिक्षकों ने सुझाव दिया कि यदि ठंड का असर इसी तरह बना रहा तो प्रशासन को स्कूल समय में बदलाव या अवकाश घोषित करने पर विचार करना चाहिए। अभिभावकों की चिंता, बच्चों की सेहत को लेकर डर दूसरी ओर, अभिभावकों का कहना है कि सुबह के समय ठंड इतनी तेज होती है कि बच्चों को बाहर भेजना जोखिम भरा है। खासकर नर्सरी और प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को सर्दी-जुकाम और बुखार का खतरा बना रहता है। कई माता-पिता ने मांग की है कि या तो स्कूलों का समय आगे किया जाए या कुछ दिनों के लिए अवकाश घोषित किया जाए। शिक्षा विभाग की चुप्पी, पढ़ाई पर असर फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। लेकिन जिस तरह स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति शून्य के करीब बनी हुई है, उससे पढ़ाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। यदि ठंड का यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में स्कूल संचालन को लेकर प्रशासन को बड़ा फैसला लेना पड़ सकता है।


