नीमच नगर पालिका के कचरे के लिए चीताखेड़ा में प्रस्तावित डंपिंग यार्ड का ग्रामीणों ने भारी विरोध किया। अंबे माता मंदिर और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के पास आवंटित इस भूमि का सीमांकन करने पहुंची राजस्व टीम को ग्रामीणों के आक्रोश के कारण बिना कार्रवाई के लौटना पड़ा। यह घटना जिला कलेक्टर डॉ. हिमांशु चंद्रा के निर्देश पर हुई। जीरन तहसीलदार शत्रुघ्न चतुर्वेदी, नायब तहसीलदार कमलेश डुडवे और पटवारी संदेश चैलावत सहित राजस्व अमला 10 हेक्टेयर भूमि का सीमांकन करने मौके पर पहुंचा था। टीम के पहुंचते ही चीताखेड़ा, रामनगर और लक्ष्मीपुरा के ग्रामीण बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए। उन्होंने प्रशासन के इस कदम का कड़ा विरोध किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने भी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजस्व टीम को सीमांकन किए बिना ही वापस लौटना पड़ा। पंचायत सरपंच श्रीमती मंजू जैन और प्रतिनिधि मनसुख जैन ने प्रशासन की इस कार्रवाई को तानाशाही बताया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत को अंधेरे में रखकर इतना बड़ा फैसला लिया गया है, जो सीधे तौर पर ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। सरपंच ने चेतावनी दी कि नीमच शहर की गंदगी को 20 किलोमीटर दूर लाकर बच्चों के भविष्य और आस्था के केंद्र मंदिर के पास डालना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रशासन ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो वे सड़क पर उतरकर भूख हड़ताल करेंगी। मौके पर मौजूद ग्रामीणों का तर्क था कि स्कूल और मंदिर जैसे पवित्र स्थानों के पास ट्रेचिंग ग्राउंड बनने से पर्यावरण दूषित होगा। इससे दुर्गंध फैलेगी और पूरा इलाका बीमारियों की चपेट में आ सकता है। विरोध की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार शत्रुघ्न चतुर्वेदी ने जनता में भारी असंतोष स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि मौके की विषम परिस्थितियों और ग्रामीणों की भावनाओं से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। फिलहाल, प्रशासन की वापसी के बाद भी क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी भूमि को कूड़ादान नहीं बनने देंगे और इस फैसले का लगातार विरोध करेंगे।


