लाहोरी गेट के पास राम बाग की ओर जाती सड़क चौक फरीद के पास कटड़ा जैमल सिंह व रामबाग रोड: यहां फुटपाथ और सड़कों पर बेतरतीब पार्क किए गए वाहनों के कारण पैदल चलना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। दुकानदारों ने अपनी सीमा लांघकर फुटपाथों पर सामान सजा लिया है। चौक फरीद: यहां दुकानदारों ने फुटपाथ को अपनी निजी संपत्ति मान लिया है। राहगीर भारी ट्रैफिक के बीच सड़क पर चलने को मजबूर हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। लोहगढ़ गेट (साइकिल ट्रैक): प्रशासन ने यहां साइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों की लागत से ट्रैक बनाया था, लेकिन अब वहां सब्जी विक्रेताओं का कब्जा है। बेरी गेट: यहां फुटपाथों का इस्तेमाल ‘पार्किंग लॉट’ के रूप में हो रहा है। गेट के सामने कतार में खड़ी गाड़ियां राहगीरों का रास्ता रोक रही हैं। हैरानी की बात यह है कि हेरिटेज स्ट्रीट जैसे संवेदनशील इलाके में प्रशासन की सख्ती बेअसर साबित हो रही है। दुकानदारों का रवैया ‘चूहे-बिल्ली’ के खेल जैसा है; जैसे ही नगर निगम या पुलिस की टीम आती है, सामान अंदर कर लिया जाता है, लेकिन टीम के जाते ही फुटपाथ फिर से दुकानों में तब्दील हो जाते हैं। कब्जों के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों और बच्चों को हो रही है। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि प्रशासन केवल खानापूर्ति न करे, बल्कि अतिक्रमण के खिलाफ कोई ठोस और स्थायी समाधान निकाले। भास्कर न्यूज |अमृतसर अमृतसर के मुख्य व्यापारिक केंद्रों और ऐतिहासिक रास्तों पर दुकानदारों और वाहन चालकों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण ने पैदल चलने वाले राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है। शहर के व्यस्त इलाकों कटड़ा जैमल सिंह से लेकर हेरिटेज स्ट्रीट तक स्थिति यह है कि फुटपाथ अब चलने के लिए नहीं, बल्कि सामान सजाने और गाड़ियां खड़ी करने के काम आ रहे हैं। चौक फरीद पर भी दुकानदारों ने फुटपाथ को अपनी निजी संपत्ति मान लिया है। सामान बाहर होने के कारण राहगीर ट्रैफिक के बीच सड़क पर चलने को मजबूर हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। जैसे ही नगर निगम या पुलिस की टीम आती है, सामान अंदर कर लिया जाता है, लेकिन टीम के जाते ही फुटपाथ फिर से दुकानों में तब्दील हो जाते हैं। कब्जों के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों और बच्चों को हो रही है।


