वारिस मलिक | जालंधर प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन को पारदर्शी और आसान बनाने के लिए शुरू हुई ईजी रजिस्ट्रेशन सवालों के घेरे में है। ईजी रजिस्ट्रेशन के नए सिस्टम में सब-रजिस्ट्रार की जगह दो जॉइंट सब-रजिस्ट्रार और डीड असिस्टेंट बिठाए, ताकि पुराना नेक्सस खत्म करते हुए प्राइवेट कारिंदों का जुगाड़ खत्म किया जाए। प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए सारी व्यवस्था ऑनलाइन की गई ताकि लोगों के डॉक्यूमेंट रेंडमली अंदर बैठे अधिकारियों के पास पहुंच जाएं, लेकिन डीड राइटर्स ने इसका भी ‘सौखा जुगाड़’ निकाल लिया है। नतीजा यह कि आम लोग अब भी डीड राइटर्स के जाल में फंसे हुए हैं और कुछ खास लोगों की रजिस्ट्रियां मनपसंद जॉइंट सब-रजिस्ट्रार के पास आराम से हो रही हैं। सब-रजिस्ट्रार-1 में 14% और सब-रजिस्ट्रार-2 में 13 फीसदी तक रिजेक्शन रेट बढ़ गया है। जिला प्रशासन ने गलत डॉक्यूमेंट अपलोड करने वाली दो आईडी गुरविंदर 2018, परमीत एडीवी 1981 की पहचान की है, जो ब्लॉक की जाएंगी। ईजी रजिस्ट्रेशन में तकनीकी खामियों को दूर करने की जरूरत है। ऐसे समझें प्री-अप्रूवल में हो रहा खेल दो आईडी पहचान में आई हैं, जल्द ब्लॉक की जाएंगी ^ईजी रजिस्ट्रेशन को लगातार मॉनिटर किया जा रहा है। जो फर्द नहीं पढ़ी जा रही, उन्हें अधिकारी खुद डाउनलोड करके चेक कर रहे हैं। दो आईडी रविंदर 2018 व परमीत एडीवी 1981 पर ज्यादातर गलत डॉक्यूमेंट अपलोड हुए हैं। इन्हें जल्द ब्लॉक किया जाएगा। इसके अलावा सभी तरह के डॉक्यूमेंट अपलोड होने वाली आईडी पर नजर बनी हुई है। -नवदीप सिंह, डिस्ट्रिक्ट रेवेन्यू अफसर डीड राइडर या फिर कोई भी व्यक्ति डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन से पहले प्री-अप्रूवल अनिवार्य है। प्री-अप्रूवल के लिए कोई फीस नहीं है और जब अधिकारी डॉक्यूमेंट को अप्रूव करता है, तब 500 रुपए फीस देनी होती है। प्री-अप्रूवल की व्यवस्था ऑनलाइन है, कोई भी डॉक्यूमेंट किस अधिकारी के पास जाएगा, यह सिस्टम ही तय करता है लेकिन पसंदीदा अधिकारी के पास भेजने के लिए व्यक्ति बार-बार फाइल जेनरेट कर रहा है। डीड राइटर या व्यक्ति खुद गलत डॉक्यूमेंट या कोई भी कागज अटैच करके बार-बार फाइल प्री अप्रूवल के लिए भेजता है, उदाहरण के तौर पर अगर 5 फाइल भेजता है, उसमें से एक तो उसके पसंदीदा अफसर के पास जाएगी। और फिर खेल शुरू हो जाता है। दूसरा तरीका : प्री-अप्रूवल के बाद जो फाइलें रिजेक्ट हो रही हैं, उन्हें अपने पास ही संभाल कर रखा जा रहा है, जब कभी उसका पसंदीदा अधिकारी, जिसके साथ उसकी सांठ-गांठ होती है, उसके आने के बाद उसी फाइल में डॉक्यूमेंट बदल कर रजिस्ट्री करवाई जा रही है। दर्जनों फाइलों में सिर्फ आधार कार्ड अटैच करके ही भेजा जा रहा है।


