बलरामपुर-रामानुजगंज के ग्राम तेतरडीह में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर आदिवासी नायकों वीर शहीद नीलांबर-पीतांबर की जयंती मनाई गई। खेरवार-खरवार-खैरवार आदिवासी समाज के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य सामाजिक महासम्मेलन में जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में खैरवार समाज के लोग शामिल हुए। महासम्मेलन की शुरुआत वीर शहीद नीलांबर-पीतांबर की प्रतिमा पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने नीलांबर-पीतांबर के संघर्ष, इतिहास, आदिवासी अस्मिता और संवैधानिक अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि नीलांबर-पीतांबर 19वीं सदी के महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने 1857 की क्रांति के दौरान पलामू क्षेत्र में अंग्रेजी शासन और स्थानीय जमींदारी शोषण के खिलाफ सशस्त्र जनआंदोलन का नेतृत्व किया था। खरवार (भोगता) आदिवासी समाज से संबंध रखने वाले इन दोनों भाइयों ने गुरिल्ला युद्ध में निपुणता हासिल की थी। उन्होंने जंगल-पहाड़ को अपना हथियार बनाकर अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी। अंततः 28 मार्च 1859 को लेस्लीगंज में उन्हें फांसी दे दी गई। खैरवार समाज के युवाओं से एकजुट होने की अपील खैरवार समाज युवा प्रभाग के प्रदेश अध्यक्ष अमित सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि नीलांबर-पीतांबर केवल इतिहास नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के आत्मसम्मान की जीवित चेतना है। उन्होंने युवाओं से संगठित होने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा, संगठन और संविधान के रास्ते ही समाज अपने अधिकारों के लिए आगे बढ़ेगा। अमित सिंह ने यह भी बताया कि आने वाले समय में समाज शिक्षा, रोजगार, जल-जंगल-जमीन और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर संगठित आंदोलन खड़ा करेगा। वक्ताओं ने महिलाओं की भागीदारी को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि नारी शक्ति के बिना कोई भी सामाजिक परिवर्तन संभव नहीं है। कार्यक्रम के दौरान “आदिवासी एकता जिंदाबाद” और “नीलांबर-पीतांबर अमर रहें” के नारों से वातावरण गूंजता रहा। उपस्थित जनसमूह ने समाज को संगठित रखने और अन्याय के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन “जय नीलांबर-पीतांबर, जय आदिवासी समाज” के नारों के साथ हुआ।


