जैसलमेर में शीतलहर: 8वीं तक 14 जनवरी तक स्कूल बंद:कक्षा 9-12 का समय बदला, बोर्ड प्रैक्टिकल यथावत रहेंगे, कलेक्टर ने निकाले आदेश

सरहदी जिले जैसलमेर में कड़ाके की ठंड और बर्फीली हवाओं के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम विभाग द्वारा जारी ऑरेंज अलर्ट और लगातार गिरते तापमान को देखते हुए जिला प्रशासन ने छोटे बच्चों को राहत दी है। जिला कलेक्टर प्रताप सिंह ने रविवार को एक आदेश जारी कर नर्सरी से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों के लिए अवकाश की अवधि को बढ़ाकर 14 जनवरी 2026 कर दिया है। कलेक्टर के आदेशानुसार, कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल बंद नहीं रहेंगे, लेकिन उनके समय में बदलाव किया गया है। अब ये कक्षाएं सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होंगी। वहीं, शिक्षकों और अन्य स्टाफ के लिए कोई राहत नहीं है; उन्हें निर्धारित समय पर ही स्कूल पहुंचना होगा। पहले 10 जनवरी तक थी छुट्टी, अब बढ़ी इससे पहले प्रशासन ने 8 से 10 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश घोषित किया था। हालांकि, रविवार को भी जिले में शीतलहर का प्रकोप बना रहा। तापमान में सुधार न होने और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने इस अवकाश को चार दिन और आगे बढ़ा दिया है। यह आदेश जिले के सभी सरकारी, निजी, सीबीएसई स्कूलों, प्ले स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर समान रूप से लागू होगा। बड़ी कक्षाओं के समय में बदलाव, स्टाफ को राहत नहीं कलेक्टर के आदेशानुसार, कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल बंद नहीं रहेंगे, लेकिन उनके समय में बदलाव किया गया है। अब ये कक्षाएं सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होंगी। वहीं, शिक्षकों और अन्य स्टाफ के लिए कोई राहत नहीं है; उन्हें निर्धारित समय पर ही स्कूल पहुंचना होगा। बोर्ड प्रैक्टिकल परीक्षाओं पर असर नहीं आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड प्रायोगिक परीक्षाएं अपने तय समय सारिणी के अनुसार ही होंगी। छात्रों को परीक्षा के लिए निर्धारित समय पर केंद्र पहुंचना होगा। कलेक्टर की चेतावनी: निजी स्कूल न करें आदेश की अनदेखी जिला कलेक्टर प्रताप सिंह ने कहा है कि सभी संस्था प्रधान आदेश की पालना सुनिश्चित करें। यदि कोई भी निजी या सरकारी स्कूल इस अवधि में छोटी कक्षाओं के बच्चों को स्कूल बुलाता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उधर, अभिभावकों ने इस निर्णय की सराहना की है, क्योंकि अलसुबह चलने वाली बर्फीली हवाओं के बीच बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा साबित हो रहा था।

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