14 जनवरी को सूर्य नारायण के मकर राशि में प्रवेश करने के बाद खरमास खत्म हो जाएंगे। वहीं, इसके बाद मांगलिक कार्य शुरू हो सकेंगे। इस दौरान शादी, मुंडन, गृह प्रवेश, देव प्रतिमा प्रतिष्ठा, गृह निर्माण और उपनयन संस्कार जैसे कार्यक्रम होंगे। विद्वानों के अनुसार, 15 दिसंबर 2025 को सूर्य भगवान ने धनु राशि में प्रवेश किया था। इसी के साथ खरमास शुरू हो गए थे, जो एक महीने तक चला। मान्यताओं के अनुसार खरमास में मांगलिक कार्य नहीं होते। शिव शक्ति मां बगलामुखी धाम के पंडित विजय शास्त्री ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन पानी में काले तिल और गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इससे सूर्य भगवान की कृपा होती है और कुंडली के ग्रह दोष दूर होते हैं। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति पर खाने में तिल का सेवन करना चाहिए। यह पर्व पितरों से संबंधित शुभ कर्मों के लिए भी महत्वपूर्ण है। 14 जनवरी को श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान आदि कर्म भी जरूर करें। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति पर तिल का उबटन लगाएं। तिल से तर्पण करें। इस दिन गर्म कपड़ों का, अनाज, धन और भोजन का दान करें। किसी मंदिर में पूजन सामग्री चढ़ाएं। शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। जल में थोड़े से काले तिल जरूर डालें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। मकर संक्रांति के दिन स्नान के बाद जल से भरे तांबे की गड़वी में पानी काला तिल, गुड़ का छोटा टुकड़ा और गंगाजल मिलाकर सूर्यदेव के मंत्रों का जाप करते हुए उन्हें अर्घ्य दें। इस दिन सूर्यदेव को अर्घ्य देने के साथ ही शनिदेव को भी जल अर्पित करें। इसके बाद गरीबों को तिल का दान करें।


