इंदौर-बुधनी के बीच 205 किमी नई ब्रॉड गेज रेल लाइन का निर्माण कार्य चल रहा है। इस रास्ते में बनने वाली दो टनल में से एक एमपी की सबसे लंबी टनल होगी, जो 8.64 किमी की बनाई जानी है। वहीं दूसरी टनल 1.24 किमी ही रहेगी। टनल निर्माण के काम में 100 मीटर खुदाई पूरी हो चुकी है। आरवीएनएल इस प्रोजेक्ट में काम कर रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत 2 सुरंगें, 80 बड़े पुल, 99 छोटे पुल, 138 RUB, 5 ROB, 2 लंबे वायाडक्ट और 18 नए स्टेशन बनेंगे। यह इंदौर और बुदनी के बीच एक सीधा, छोटा और तेज रेल लिंक प्रदान करेगा, जिससे भीड़भाड़ वाले भोपाल-इटारसी मार्ग से बचा जा सकेगा। प्रदेश की सबसे लंबी टनल की 100 मीटर खुदाई
आरवीएनएल के मीडिया एडवाइजर अनिल सक्सेना ने बताया कि 8.64 किमी वाली टनल प्रदेश की सबसे लंबी टनल होगी। अधिकांश क्षेत्र में केवल मिट्टी है, जिससे वहां सुरंग की खुदाई करना हमारे लिए बड़ा चैलेंज है। चट्टानों को काटने में दिक्कत नहीं होती लेकिन मिट्टी में खुदाई करते समय धंसने, नालों के पानी से सीपेज का सामना करना पड़ रहा है। 2 महीने पहले हमने टनल-2 की खुदाई शुरू की। जिसमें चैलेंज होने से एक दिन में केवल 1.1 मीटर की खुदाई कर पा रहे है। हमें उम्मीद है 8.64 किमी की सुरंग आसानी से बना लेंगे। सीहोर, देवास, इंदौर से निकलेगी
परियोजना में बुदनी (भोपाल-नागपुर खंड पर) और मंगलियागांव/इंदौर, जो राज्य के प्रमुख वाणिज्यिक और औद्योगिक केंद्रों में से एक है, के बीच लगभग 198-205 किमी के एक नए सीधे ब्रॉड गेज रेल कॉरिडोर के निर्माण की परिकल्पना की गई है। यह अलाइनमेंट सीहोर, देवास और इंदौर जिलों से होकर गुजरता है, जो कई कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ता है। इन क्षेत्रों में आज तक रेल नहीं पहुंच पाई है। बुधनी में बनेगा जंक्शन, मुंबई-दिल्ली-नागपुर ट्रैक से जुड़ेगा
बुधनी इंदौर नई रेलवे लाइन सीधे मुंबई, दिल्ली और नागपुर लाइन से सीधी जुड़ जाएगी। बुधनी में जंक्शन बनेगा। नई लाइन अत्यधिक भीड़भाड़ वाले भोपाल-इटारसी खंड और बुदनी-बरखेड़ा घाट खंड को बायपास कर देगी। इसके परिणामस्वरूप दूरी और यात्रा के समय में काफी कमी आएगी, विशेष रूप से इंदौर को पूर्वी और मध्य मध्य प्रदेश से जोड़ने वाले मार्गों के लिए, जिसमें जबलपुर, नागपुर और उससे आगे के स्थान शामिल हैं। मार्ग और अलाइनमेंट
रेल लाइन बुदनी से शुरू होती है और इंदौर (मंगलियागांव) के पास समाप्त होगी है, जो मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच एक छोटा और अधिक कुशल रेल लिंक प्रदान करती है। अलाइनमेंट को ग्रेडियंट को अनुकूलित करने, वक्रता को कम करने और यात्री और माल ढुलाई दोनों परिचालनों के लिए भविष्य में यातायात वृद्धि को समायोजित करने के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई है। मुख्य इंजीनियरिंग विशेषताएं
इंदौर-बुदनी प्रोजेक्ट में बड़े और जटिल सिविल इंजीनियरिंग काम शामिल हैं, जिसमें सुरंगें, पुल और वायाडक्ट शामिल हैं। टनल-2 देवास जिले के ग्राम बागली, कन्नौद तहसील के अंतर्गत आने वाले कमलापुर, थालघेवारिया और हटनोरा गांवों से होकर गुजरेगी। आरवीएनएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) सलीम अहमद ने कहा, इतनी कमजोर एवं जटिल भू-गर्भीय परिस्थितियों में टनल-2 की पहली 100 मीटर खुदाई को सफलतापूर्वक पूर्ण करना आरवीएनएल टीम की एक सराहनीय उपलब्धि है। यह माइलस्टोन सुरक्षा, इंजीनियरिंग उत्कृष्टता एवं अनुशासित निष्पादन पर हमारे मजबूत फोकस को दर्शाता है। पुल, वायाडक्ट, 15 क्रासिंग स्टेशन बनेंगे मुख्य इंजीनियरिंग चुनौतियां
• मैदानी इलाकों से लेकर ऊबड़-खाबड़ और पहाड़ी इलाकों तक अलग-अलग स्थला कृति कनेक्टिविटी और रणनीतिक फायदे सामाजिक-आर्थिक प्रभाव इंदौर-बुदनी रेल कॉरिडोर से क्षेत्रीय विकास में तेज़ी आने की उम्मीद है, जिससे बाज़ारों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोज़गार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। निर्माण और संचालन के दौरान, यह प्रोजेक्ट बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार पैदा करेगा और कॉरिडोर के किनारे औद्योगिक, कृषि और वाणिज्यिक विकास को बढ़ावा देगा। यह खबर भी पढ़ें
विंध्याचल पर्वत को चीरकर बन रही हैं 6 सुरंग मध्यप्रदेश में भारतीय रेलवे ने इतिहास रच दिया है। नर्मदापुरम में बुधनी से बरखेड़ा के बीच 26.50 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का काम अंतिम चरण में है। यह ट्रैक रातापानी अभयारण्य से होकर गुजरता है। रेलवे ने यहां विंध्याचल पर्वत को काटकर 6 टनल बनाई हैं। फिलहाल सिंगल ट्रैक है। चौथी लाइन का प्रस्ताव होने पर दूसरा ट्रैक भी डाला जाएगा। सुरंगों में से ट्रेनें 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी। पूरी खबर पढ़ें


