उज्जैन के लोग बेहद प्यारे और संवेदनशील हैं। यहां लोगों में अपनापन का भाव है। उज्जैन के खाने का टेस्ट भी अलग और स्वादिष्ट है। यहां मैंने पोहा, जलेबी, लौंग की सेव, खमण, कचोरी और समोसा टेस्ट किया है। दाल-बाटी खाने के लिए फिर उज्जैन आऊंगा। जाने-माने फिल्म अभिनेता और फूड ब्लॉगर के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले आशीष विद्यार्थी ने भास्कर से विशेष चर्चा में यह बात कही। रविवार को उन्होंने श्री महाकालेश्वर मंदिर सहित अन्य मंदिरों में दर्शन किए। विद्यार्थी ने एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि मैं 50 साल पहले अखिल भारतीय कालिदास समारोह में 10 वर्ष की आयु में नाटक ‘उत्तर रामचरित’ करने के लिए उज्जैन आया था। उस नाटक में मैंने लव की भूमिका निभाई थी, तभी से उज्जैन से मेरा लगाव है। भगवान श्री महाकालेश्वर की महिमा है कि मैं यहां आ पाया हूं। विद्यार्थी ने बताया कि मैं एक अभिनेता होने के साथ मोटिवेशनल स्पीकर, फूड ब्लॉगिंग के साथ कहानियां सहेजता हूं। लोगों के संघर्ष, उनके अनुभव आदि की कहानियों को औरों तक पहुंचा रहा हूं। उनका कहना है कि हमारे देश में कई कल्चर और बोलियां हैं। जब हम दूसरे कल्चर, बोलियों, खानपान, रिवाज आदि के बारे में जानते हैं तो हमें पता चलता है कि कई अलग-अलग तरीकों से भी सुखी रहा जा सकता है।


