सीहोर जिले में सड़क पर नवजात के अंतिम संस्कार के मामले का प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने सोमवार को संज्ञान लिया है। यह घटना 6 जनवरी को सीहोर-भेरुंदा मार्ग पर सामने आई थी। दरअसल, 5 जनवरी को एक व्यक्ति ने जिला अस्पताल के सामने धरना दिया था और अस्पताल प्रबंधन पर कई आरोप लगाए थे। इसी व्यक्ति ने अपनी नवजात बच्ची का अंतिम संस्कार सीहोर-इछावर-भेरुंदा मार्ग पर सड़क किनारे किया था। जानकारी के अनुसार, प्रसूता ममता पति संतोष जाट को 30 दिसंबर को शाम 4:30 बजे भर्ती कराया गया था। महिला ने 2 जनवरी 2026 को रात 2:22 बजे सामान्य प्रसव से एक प्री-मैच्योर बच्ची को जन्म दिया, जिसका वजन मात्र 900 ग्राम था। शिशु को तत्काल जिला चिकित्सालय के एस.एन.सी.यू. में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत अत्यंत गंभीर थी। 5 जनवरी को दोपहर 3:30 बजे शिशु की मृत्यु हो गई। डॉक्टरों को दिया गया था नोटिस
शिशु की मृत्यु के बाद चिकित्सकों ने परिजनों को शव लेने के लिए बुलाया, लेकिन शिशु के पिता ने चिकित्सकों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों ने प्रसव के समय चिकित्सक उपलब्ध न होने और एस.एन.सी.यू. के चिकित्सक व स्टाफ द्वारा उचित व्यवहार न करने के आरोप लगाए। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, परिजनों ने प्रदर्शन से पहले सिविल सर्जन, आर.एम.ओ. या किसी अन्य वरिष्ठ चिकित्सक को सूचित नहीं किया था। आरोपों के संबंध में संबंधित चिकित्सक और स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। सड़क पर अंतिम संस्कार का वीडियो वायरल होने के बाद संतोष ने बताया कि उसे अस्पताल के सामने धरने से हटा दिया गया था। इसके बाद उसने सीहोर से भेरुंदा-इछावर मार्ग पर अपनी बच्ची के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। मामले पर प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि उस व्यक्ति ने ऐसा क्यों किया, यह तो वही बता सकता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने मामले का संज्ञान लिया है और अधिकारियों से चर्चा की है। मंत्री ने यह भी कहा कि उस व्यक्ति को प्रशासन या अन्य लोगों से मदद मांगनी चाहिए थी।


