पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार संयम लोढ़ा ने सिरोही के राम झरोखा की भूमि के कथित खुर्द-बुर्द, अवैध बेचान और लीज के मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने जयपुर में शासन सचिवालय स्थित देवस्थान विभाग की सचिव शूची त्यागी और स्वायत्त शासन भवन में विभाग के प्रमुख सचिव रवि जैन से मुलाकात कर यह आग्रह किया। लोढ़ा ने अधिकारियों को राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें न्यायालय ने नगर परिषद और राज्य सरकार को नए सिरे से जांच करवाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने 2 जनवरी को ही सिरोही जिला कलेक्टर को अवगत करवा दिया था कि नगर परिषद की जांच रिपोर्ट मिलीभगत से तैयार की गई है और संदेहास्पद है। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। दोनों अधिकारियों ने लोढ़ा को आश्वासन दिया कि वे जयपुर से एक उच्च स्तरीय दल भेजकर पूरे प्रकरण की जांच करवाएंगे। लोढ़ा ने अधिकारियों को बताया कि सिरोही शहर का रामझरोखा मंदिर और उसकी संरचनाओं सहित भूमि क्षेत्र की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर है। इसके भू-भाग का बेचान केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के सामाजिक, सांस्कृतिक और कानूनी हितों को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि मंदिर की भूमि की बिक्री से क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत, सार्वजनिक हित, कानूनी व्यवस्था और नागरिक अधिकार खतरे में पड़ते हैं। यह सांस्कृतिक धरोहर का बेचान न केवल धार्मिक और भावनात्मक रूप से संवेदनशील है, बल्कि वर्तमान कानून और न्याय व्यवस्था के दृष्टिकोण से भी पूर्णतः अवैध है।


