आदिवासी एकता परिषद द्वारा बुरहानपुर के नेपानगर क्षेत्र के ग्राम चेनपुरा में 13 से 15 जनवरी तक 33वां आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन में देशभर के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी आदिवासी समाज के लोग शामिल होंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जल, जंगल, पहाड़ और पानी के संरक्षण पर मंथन करना है। इसके अतिरिक्त, ग्लोबल वार्मिंग और बिगड़ते पर्यावरण जैसी समस्याओं पर भी गहन चर्चा की जाएगी। सोमवार दोपहर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आदिवासी एकता परिषद के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने आयोजन की जानकारी दी। आयोजन समिति के बिलर सिंह जमरा ने बताया कि महासम्मेलन में कई राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा, जिनमें प्रदूषण और पर्यावरण असंतुलन प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कहीं अतिवर्षा तो कहीं सूखा जैसी स्थितियां प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का परिणाम हैं। अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भी आएंगे
जमरा ने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि यह सब प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण हो रहा है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है और समुद्र का जल स्तर प्रभावित हो रहा है। सम्मेलन में इन समस्याओं को दूर करने के उपायों पर मंथन किया जाएगा। आदिवासी एकता परिषद के राष्ट्रीय महासचिव अशोक चौधरी ने जंगल, पहाड़ और नदियों को बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। आदिवासी एकता परिषद महिला विंग की पूर्व अध्यक्ष कुसुम रावत ने पृथ्वी को बचाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधनों के संरक्षण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दुनिया में केवल 3 प्रतिशत पानी ही पीने योग्य है, और इसके दुरुपयोग पर विचार करना आवश्यक है। इस महासम्मेलन में अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार सहित कई प्रमुख आदिवासी नेता भी उपस्थित रहेंगे। सम्मेलन 150 एकड़ क्षेत्र में होगा। आयोजकों के अनुसार सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है।


