सिरोही जिले में पालना गृहों की स्थापना की पहल के तहत, शिवगंज के सरकारी अस्पताल में एक पालना गृह का शुभारंभ किया गया। जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सावित्री आनंद निर्भीक ने इसका उद्घाटन किया। यह सुविधा अनचाहे या परित्यक्त बच्चों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इस अवसर पर कलेक्टर अल्पा चौधरी ने कहा कि अब किसी को भी अपने बच्चे को झाड़ियों में फेंकने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि वे किसी बच्चे को अपने घर में नहीं रखना चाहते, तो उसे पालना गृह में छोड़ दें, जहां उसका पूरा ध्यान रखा जाएगा। सचिव सावित्री आनंद निर्भीक ने ‘फेंको नहीं, हमें दो’ के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि यह पालना गृह उन माताओं के लिए है जो अपने बच्चे को नहीं पालना चाहतीं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. दिनेश खराड़ी ने बताया कि पालना गृह में बच्चा बिना किसी अस्पताल कर्मचारी को बताए, खिड़की के माध्यम से चुपचाप पालने में रखा जा सकता है। बच्चे को रखने के बाद अलार्म बजता है, जिससे अस्पताल स्टाफ को जानकारी मिलती है, लेकिन तब तक बच्चे को छोड़ने वाला व्यक्ति जा चुका होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार बच्चा पालने में आ जाने के बाद पुलिस या किसी अन्य एजेंसी द्वारा कोई जांच-पड़ताल नहीं की जाती है। पालना गृह एक सुरक्षित स्थान है जहां अनचाहे या परित्यक्त बच्चों को छोड़ा जाता है। बच्चे को छोड़ने के कुछ मिनट बाद सायरन बजता है, जिसके बाद स्टाफ बच्चे को वार्ड में ले जाकर स्वास्थ्य परीक्षण करता है। इसके उपरांत बच्चे को बाल कल्याण समिति को सौंपा जाता है, और फिर नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर इच्छुक दंपती को गोद दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया गोपनीय रखी जाती है, और पालना गृह के आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा भी नहीं लगाया जाता है। इस शुभारंभ कार्यक्रम में शिवगंज के एसडीएम नीरज मिश्र, तहसीलदार आशुराम, बीसीएमओ डॉ. कौशल ओहरी, पीएमओ डॉ. अखिलेश पुरोहित, पालना गृह के निर्माण में सहयोग करने वाले दानदाता राजेंद्र सोलंकी सहित अन्य चिकित्सक और स्टाफ सदस्य उपस्थित थे।


