पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सोमवार को बालाघाट प्रवास के दौरान भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने वीबीजी रामजी योजना, बांग्लादेश में हिंदुओं के कथित नरसंहार और भाजपा के “दो चेहरों” को लेकर अपनी बात रखी। शर्मा यहां इंदिरा ज्योति अभियान के प्रभारी के रूप में पहुंचे थे। कांग्रेस पर राम के नाम पर नाराजगी के आरोपों का जवाब देते हुए पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि राम की बात करने वाली भाजपा ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथुराम गोडसे के नाम से योजना का नाम शुरू किया है, जिसमें अंत में भगवान राम का नाम रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह नाथुराम गोडसे ने गांधी जी की हत्या की थी, उसी तरह भाजपा ने मनरेगा की “हत्या” की है। शर्मा ने राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार स्वयं कर्ज में डूबी है, तो वह योजना में अपना 40 प्रतिशत हिस्सा कहां से देगी। पूर्व मंत्री ने भाजपा के “दो चेहरों” के पतन की बात भी कही, जिसके बाद भाजपा संभल नहीं पाएगी। हालांकि उन्होंने उन चेहरों का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की ओर था। उन्होंने बताया कि कांग्रेस से भाजपा में गए उनके एक साथी ने भी यह बात कही है कि “जो कुछ है, वह दो चेहरे ही हैं।” पीसी शर्मा ने भाजपा और प्रधानमंत्री के भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के दावों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं का कथित नरसंहार हो रहा है, लेकिन सरकार इस बारे में बात करने को तैयार नहीं है। सरकार की ओर से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया जिससे उनकी जान बचाई जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और आम लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज करने से बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि “ना जाने कब बांग्लादेश जैसे हालात यहां पैदा हो जाएं।” तीन राज्यों में अभियान इस अवसर पर इंदिरा ज्योति अभियान के प्रमुख भास्कर राव रोकड़े ने बताया कि यह अभियान मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चलाया जा रहा है। इसकी शुरुआत 6 जनवरी को महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के शुरुआती स्थल छिंदवाड़ा के चिटनिस गंज से हुई थी। यह यात्रा छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, डिंडोरी और मंडला से होते हुए बालाघाट पहुंची है। अभियान का लक्ष्य इंदिरा गांधी के कार्यों, विचारों और क्रांतिकारी निर्णयों को हर घर और हर द्वार तक पहुंचाना है।


