एनएच-33 के चौड़ीकरण के दौरान हुए पौधरोपण पर हाईकोर्ट सख्त
झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को हजारीबाग से बरही तक एनएच-33 के चौड़ीकरण के दौरान काटे गए पेड़ों के बदले पौधारोपण और पौधों के स्थानांतरण से जुड़े मामले की सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले में झालसा और प्रार्थी को स्थल निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 28 फरवरी को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान एनएचएआई की ओर से अदालत के पूर्व आदेश के अनुपालन में जवाब दाखिल किया गया, लेकिन कोर्ट ने इस पर असंतोष व्यक्त किया। अदालत ने एनएचएआई को निर्देश दिया कि वह सभी बिंदुओं को स्पष्ट करते हुए नया और जवाब दाखिल करे। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एनएचएआई से पूछा था कि पौधारोपण के लिए स्वीकृत आठ करोड़ रुपए की राशि का किस प्रकार उपयोग किया गया है। पौधरोपण के लिए दिया गया था 8 करोड़ का फंड एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने अदालत को बताया था कि हजारीबाग से बरही के बीच एनएच-33 के दोनों ओर पौधरोपण के लिए लगभग आठ करोड़ रुपए का फंड निर्धारित किया गया था। उसका उपयोग किया गया है। हालांकि एनएचएआई की ओर से यह भी स्वीकार किया गया कि लगाए गए पौधों में से करीब 2300 पौधे ही वर्तमान में जीवित हैं। अदालत ने इस तथ्य पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर पौधों का जीवित न रहना चिंता का विषय है। इसी कारण अब कोर्ट ने झालसा और याचिकाकर्ता दोनों को स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि इस मामले में इंद्रजीत सामंता ने जनहित याचिका दाखिल की है, जिसमें एनएच-33 के चौड़ीकरण के दौरान पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और पौधारोपण में लापरवाही का मुद्दा उठाया गया है।


