एक्सपर्ट के माध्यम से तैयार कराया जाएगा पेपर:5वी-8वीं बोर्ड मार्च में, नंबर 33% से कम आए तो छुट्टियों में सुधारात्मक कक्षाएं

प्रदेश में 5वीं-8वीं की वार्षिक परीक्षा मार्च में होगी। सीजी बोर्ड से संबद्ध सभी सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों (सीबीएसई और आईसीएसई को छोड़कर) में एक साथ आयोजित जाएगी। जिन बच्चों के नंबर 33% से कम आएंगे, यानी ग्रेड ई के दायरे में आएंगे, तो उनके लिए गर्मी की छुट्टियों के दौरान रेमेडियल (सुधारात्मक) कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इस बार भी केंद्रीकृत परीक्षा जिला स्तर पर ली जाएगी। इसे जिला शिक्षा अधिकारी कराएंगे। परीक्षा के लिए पेपर एक्सपर्ट के माध्यम से तैयार कराया जाएगा। 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए जिस तरह से नजदीक के थाने में पेपर रखा जाता है, 5वीं-8वीं में भी यही सिस्टम होगा। प्रश्नपत्र किस प्रकार का होगा, इसका मॉडल परीक्षा के पहले स्कूलों को भेजा जाएगा। लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से यह मॉडल प्रश्न पत्र उपलब्ध कराया जाएगा। इस परीक्षा के लिए केंद्राध्यक्ष अन्य विद्यालय से नियुक्त किए जाएंगे। इसी तरह उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए अलग से केंद्रीय मूल्यांकन केंद्र बनाए जाएंगे। दोनों कक्षाओं में प्रदेशभर में करीब 10 लाख छात्र हैं। राज्य में पिछले साल से भी 5वीं-5वीं बोर्ड परीक्षा एक साथ आयोजित की गई थी। तब सरकारी के अलावा निजी स्कूलों को भी केंद्रीकृत परीक्षा में शामिल होने के लिए कहा गया था। कई निजी स्कूल शामिल हुए थे, लेकिन कई ने अपने स्तर पर परीक्षा ली। इस बार जिन निजी स्कूलों में सीजी पाठ्यक्रम संचालित है, वे सभी इस परीक्षा का हिस्सा बनेंगे। अधिकारियों का कहना है कि रेमेडियल (सुधारात्मक/उपचारात्मक) कक्षाओं का उद्देश्य कमजोर विद्यार्थियों की शैक्षणिक कमियों को दूर कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है। जिनका प्रदर्शन कमजोर उन्हें देनी होगी पूरक परीक्षा 5वीं-8वीं में जिन छात्रों का किसी विषय में प्रदर्शन कमजोर है, वे 33फीसदी से कम अंक प्राप्त करते हैं तो ऐसे बच्चों को पूरक परीक्षा देनी होगी। हालांकि, उन्हें अगली कक्षा यानी छठवीं या नौवीं में कक्षोन्नत किया जाएगा। बता दें कि पहली से आठवीं तक की शिक्षा शिक्षा का अधिकार अधिनियम के दायरे में आती है, जो वर्ष 2010 से लागू है। इस अधिनियम की धारा 16 के तहत 8वीं तक किसी भी छात्र को फेल करने का प्रावधान नहीं है। इसी कारण 2010-11 में पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षा समाप्त कर दी गई थी। बीते कुछ वर्षों में छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित होने के बाद अब यह परीक्षा दोबारा शुरू की जा रही है।

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