जंबूरी में सुआ, ददरिया, फागुन, भांगड़ा की झलक

जिले के ग्राम दुधली में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर्स जंबूरी में रविवार को सुबह से देर रात तक विभिन्न गतिविधियां हुईं। विभिन्न राज्यों से पहुंचे प्रतिभागियों ने अपनी लोक-संस्कृति, वेशभूषा, संगीत और नृत्य से ऐसा समां बांधा कि विविधता में एकता का संदेश हर पल जीवंत दिखाई दिया। खास कर राजस्थान की प्रस्तुति में पारंपरिक परिधान, लोकधुन और गीतों की उमंग-ऊर्जा से भरे कार्यक्रम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकनृत्यों और गीतों के माध्यम से मरुधरा की सांस्कृतिक शान झलकी। वहीं पंजाब की प्रस्तुति में जोश, फुर्ती और आत्मविश्वास साफ नजर आया। सारी दुनिया तों अन्नदाता होन्दा जैसे संदेशों के साथ भांगड़ा ने कृषि संस्कृति और श्रम की महत्ता को रेखांकित किया। इसी प्रकार दिल्ली को शहरों का शहर नहीं, बल्कि देश की धड़कन के रूप में प्रस्तुत किया गया। फिल्मी गीतों, आधुनिक रैंप प्रस्तुति सांस्कृतिक कोलाज ने राजधानी की बहुरंगी पहचान को उभारा। सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने शहर व ग्रामीण क्षेत्र के लोग पहुंचे थे। तेलंगाना की दक्षिण भारतीय लोकनृत्य वाद्य ने आकर्षित किया, मिली शाबाशी तेलंगाना राज्य की प्रस्तुति में लोकनृत्य, वाद्य और समकालीन रंगमंच का सुंदर समन्वय देखने को मिला। यहां के प्रतिभागियों ने दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक धारा को प्रभावी ढंग से सामने रखा। छत्तीसगढ़ लोकनृत्यों की मिठास भरी प्रस्तुति में सुआ, मदार और ददरिया जैसे लोकनृत्य का समावेश रहा। सादगी, सामूहिकता और लोक जीवन की खुशबू से भरे इन नृत्यों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। मध्य प्रदेश की लोककला ने अपनी विशिष्टता से मंच को समृद्ध किया। जहां पारंपरिक नृत्य-गीतों के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक गहराई दिखाई दी। ओड़िशा की प्रस्तुति भी सराहनीय रही।

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