उत्तर भारत से आ रही बर्फीली शीतलहर के कारण जैसलमेर में सर्दी ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। रविवार रात पारे में 1 डिग्री की गिरावट के साथ तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जो इस सीजन की सबसे ठंडी रात रही। हालांकि, मंगलवार को धूप खिलने से दिन का पारा 21 डिग्री तक पहुंचा, जिससे लोगों को ठिठुरन से थोड़ी राहत मिली। वहीं जैसलमेर शहर सहित ग्रामीण व नहरी इलाकों में और रेतीले टीलों पर ओस की बूंदें जमी। रेत के धोरों पर सफेद बर्फ की चादर बिछी नजर आई। ग्रामीण इलाकों में बाल्टियों में रखा पानी बर्फ बन गया और खड़ी गाड़ियों की छतों पर बर्फ की परत जम गई। मौसम विभाग की माने तो आगामी 48 घंटों तक शीतलहर का असर बरकरार रहने की संभावना है, जिससे तापमान में और गिरावट आ सकती है। किसानों की चिंता: रबी फसलों पर संकट कड़ाके की इस ठंड ने किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। लाठी और रामदेवरा क्षेत्र में शीतलहर के साथ गिरे पाले ने रबी की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। किसान राकेश माली ने बताया कि सरसों, ईसबगोल, जीरा और अरंडी की फसलें पाले के कारण झुलस गई हैं। अत्यधिक ठंड से पौधों की कोशिकाओं में पानी जम जाने से फसल काली पड़ने का खतरा बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञ की सलाह: ऐसे बचाएं फसल मौसम वैज्ञानिक अतुल गालव ने किसानों को सचेत करते हुए कहा है कि पाला रात 3 से सुबह 5:30 बजे के बीच सबसे अधिक प्रभावी होता है। बचाव के लिए किसान ये उपाय अपनाएं: मौसम विभाग की माने तो आगामी 48 घंटों तक शीतलहर का असर बरकरार रहने की संभावना है, जिससे तापमान में और गिरावट आ सकती है।


