जंगस से बाहर निकली बाघिन, हाथियों से किया रेस्क्यू:10 दिन पहले निकली थी, अब ट्रेंकुलाइज कर वापस जंगल में छोड़ेंगे

माधव टाइगर रिजर्व की बाघिन एमटी-6 को मंगलवार सुबह ट्रेंकुलाइज कर लिया गया। बांधवगढ़ से 27 दिसंबर को लाई गई यह बाघिन पिछले 10 दिनों से रिहायशी इलाकों में घूम रही थी और मवेशियों का शिकार कर रही थी, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई थी। जानकारी के अनुसार, बाघिन 31 दिसंबर को रिजर्व के कोर एरिया से बाहर निकलकर सतनबाड़ा थाना क्षेत्र के डोंगर गांव पहुंच गई थी। 1 जनवरी की सुबह उसने गांव के बुजुर्ग शिवलाल बघेल पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। वन अमले ने काफी मशक्कत के बाद उसे जंगल की ओर खदेड़ा था। कई दिनों से ग्रामीण दहशत में थे
अगले ही दिन बाघिन फिर कोर एरिया से बाहर आ गई। 2 जनवरी को उसे सुरवाया थाना क्षेत्र के सरदारपुरा, खुटेला और मोहम्मदपुर गांवों के आसपास घूमते देखा गया। इस दौरान उसने कई मवेशियों को अपना शिकार बनाया। बाघिन की मौजूदगी से ग्रामीण छतों पर चढ़ने को मजबूर थे और किसान खेतों में पानी देने भी नहीं जा पा रहे थे। ट्रैकिंग टीम, रेंजर और टाइगर रिजर्व का अमला लगातार बाघिन पर नजर बनाए हुए था। 10 दिन गुजर जाने के बाद भी जब बाघिन वापस कोर एरिया में नहीं लौटी और जनहानि की आशंका बढ़ गई, तो उसे ट्रेंकुलाइज करने का निर्णय लिया गया। हाथियों की मदद से किया रेस्क्यू आज मंगलवार सुबह करीब 10 बजे सीसीएफ उत्तम शर्मा, डीएफओ, रेंजर, डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची। सुरक्षा की दृष्टि से आसपास के गांवों में पुलिस बल तैनात किया गया। बाघिन को ट्रेंकुलाइज करने के लिए दो हाथियों की मदद ली गई। एक हाथी पर सीसीएफ और डीएफओ सवार थे, जबकि दूसरे हाथी पर डॉक्टरों और रेस्क्यू टीम के सदस्य मौजूद थे। करीब 11 बजे भरकुली गेट के सामने बाघिन की लोकेशन ट्रैक की गई और उसे ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर लिया गया।

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