झाबुआ में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीईआरएफ (SDERF) की संयुक्त टीम ने बहादुर सागर तालाब में ‘जल आपदा बचाव प्रदर्शन’ आयोजित किया। इसका उद्देश्य बाढ़ और जल आपदा जैसी आपातकालीन स्थितियों में त्वरित और प्रभावी राहत कार्यों के प्रति आम जनता को जागरूक करना था। इस प्रदर्शन के दौरान तालाब के बीच बने एक टापू को आधार बनाकर बाढ़ में फंसे व्यक्तियों को बचाने का जीवंत अभ्यास किया गया। 11वीं वाहिनी एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट राम भवन सिंह यादव ने बताया कि आपदा के समय हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने बचाव की प्राथमिकताओं और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) पर विस्तृत जानकारी दी। प्रदर्शन में बचाव की तीन मुख्य श्रेणियां दिखाई गईं। इनमें किनारे से तैरने में सक्षम व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना (ड्राई रेस्क्यू), कम तैरना जानने वाले व्यक्ति को लाइफ बॉय की मदद से बचाना (लाइफ बॉय रेस्क्यू), और डूब रहे व्यक्ति को प्रशिक्षित गोताखोरों द्वारा पानी के भीतर से निकालकर सुरक्षित लाना (डीप वाटर रेस्क्यू) शामिल था। इस महत्वपूर्ण अभ्यास में डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट शशिधर पिल्लई, तहसीलदार सुनील डावर सहित एनडीआरएफ-एसडीईआरएफ की टीमें, सिविल डिफेंस के सदस्य और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल सर्वाइवल डिवाइस की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यदि पेशेवर उपकरण उपलब्ध न हों, तो घर में मौजूद खाली प्लास्टिक बोतलें, टायर ट्यूब, खाली ड्रम और इन्फ्लेटेबल ट्यूब भी जीवन रक्षक साबित हो सकते हैं। ये उपकरण पीड़ित को पानी की सतह पर बनाए रखने और बचाव दल के पहुंचने तक समय देने में सहायक होते हैं। बचाव के बाद प्राथमिक चिकित्सा का चरण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। कार्यक्रम के अंत में सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) तकनीक का प्रदर्शन किया गया। एनसीसी कैडेट्स को इसका अभ्यास कराया गया, ताकि युवा पीढ़ी किसी भी दुर्घटना के समय प्राथमिक जीवन रक्षक सहायता प्रदान करने के लिए तैयार रहे।


