ट्रम्प बोले- टैरिफ के खिलाफ फैसला आया तो तबाही मचेगी:फिर कोई भी हालात संभाल नहीं पाएगा; टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट कल फैसला सुनाएगा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया, तो अमेरिका के लिए हालात पूरी तरह बिगड़ सकते हैं। ट्रम्प ने कहा कि ऐसा हुआ तो देश पूरी तरह फंस जाएगा और सब कुछ गड़बड़ हो जाएगा। द गार्जियन के मुताबिक ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट लिखते हुए कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ के खिलाफ फैसला दिया, तो हालात संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा। यह मामला उनकी विवादित आर्थिक नीति और राष्ट्रपति की शक्तियों की एक बड़ी कानूनी परीक्षा माना जा रहा है। दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट 14 जनवरी को ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ से जुड़े मामले पर फैसला सुनाने वाला है। यह मामला ट्रम्प सरकार की तरफ से लगाए गए टैरिफ की कानूनी वैधता से जुड़ा है। इसमें यह देखा जाएगा कि क्या राष्ट्रपति को इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत इतने बड़े टैरिफ लगाने का अधिकार है या नहीं। यह कानून 1977 में नेशनल इमरजेंसी हालात के लिए बनाया गया था, जो कुछ हालात में नेशनल इमरजेंसी के दौरान राष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर रोक लगाने या कंट्रोल का अधिकार देता है। ट्रम्प ने व्यापार घाटे को इमरजेंसी बताकर टैरिफ लगाया था ट्रम्प ने बढ़ते व्यापार घाटे को नेशनल इमरजेंसी बताते हुए दुनिया के ज्यादातर देशों पर टैरिफ लगाया था। ट्रम्प ने कहा कि अगर टैरिफ हटाए गए, तो कंपनियां और कई देश अमेरिका से पैसा वापस मांगेंगे। उन्होंने कहा कि यह तय करना बहुत मुश्किल होगा कि कितना पैसा लौटाना है, किसे देना है और कब देना है। इस पूरी प्रोसेस में कई साल लग सकते हैं और अमेरिका के लिए इतनी बड़ी रकम चुकाना लगभग नामुमकिन होगा। इससे देश में पूरी तरह अव्यवस्था फैल जाएगी। पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प सरकार के टैरिफ लगाने के कानूनी आधार पर सवाल उठाए थे। उस दौरान जजों ने पूछा था कि क्या राष्ट्रपति को इस तरह के ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार है। कोर्ट ने इस मामले में लंबी सुनवाई की थी। अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रम्प के खिलाफ आता है अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रम्प के पक्ष में आता है ट्रम्प के खिलाफ 12 राज्यों ने मुकदमा दायर किया ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल इन टैरिफ के ऐलान किए थे। इन टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के कई छोटे कारोबारी और 12 राज्यों ने मुकदमा दायर किया है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति ने अपनी सीमा से बाहर जाकर आयात होने वाले सामान पर नए टैरिफ लगाए। एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनॉय, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मैक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट राज्यों ने छोटे कारोबारियों के साथ मिलकर ट्रम्प सरकार के खिलाफ यह केस किया है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने से पहले दो निचली अदालतों में भी गया था। दोनों अदालतों ने कहा था कि ट्रम्प के पास ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। नवंबर में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड के मुद्दे पर ज्यादा चर्चा नहीं की थी, लेकिन जस्टिस एमी कोनी बैरेट ने कहा था कि पहले से वसूले गए टैक्स को वापस करना एक पूरी तरह गड़बड़ करने वाली स्थिति बन सकती है। ट्रम्प के टैरिफ से वोक्सवैगन कार की बिक्री घटी एक रिपोर्ट में जर्मनी की कार कंपनी वोक्सवैगन ने बताया कि ट्रम्प के टैरिफ की वजह से अमेरिका में उसकी बिक्री घटी है। कंपनी ने कहा कि पिछले साल उसकी ग्लोबल बिक्री 1.4% कम हुई। अमेरिका में बिक्री 8.2% गिर गई, जबकि चीन में भी बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। वहीं यूरोप और दक्षिण अमेरिका में कंपनी की बिक्री बढ़ी है।

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