मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मेडिकल छात्रा डॉ. सृष्टि मालवीय को बड़ी राहत देते हुए मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिया है कि वह छात्रा के मूल शैक्षणिक दस्तावेज तत्काल वापस करे। यह आदेश AIIMS में एमसीएच कोर्स की काउंसलिंग में शामिल होने के लिए दायर याचिका पर दिया गया। डॉ. सृष्टि मालवीय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि वे वर्तमान में एक निजी मेडिकल संस्थान में अध्ययनरत हैं, लेकिन उनका चयन ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में हो गया है। काउंसलिंग प्रक्रिया के लिए उन्हें कक्षा 10वीं की मूल अंकसूची और एमबीबीएस के तीसरे राउंड की प्रोविजनल मार्कशीट प्रस्तुत करनी थी, जो इंदौर के श्री अरबिंदो मेडिकल कॉलेज के पास जमा थी। फीस जमा होने के बावजूद रोके गए थे दस्तावेज
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने कॉलेज बॉन्ड के तहत पूरी ₹39.40 लाख रुपए की ट्यूशन फीस पहले ही जमा कर दी है, इसके बावजूद मूल दस्तावेज वापस नहीं किए जा रहे थे, जिससे उनके करियर पर संकट खड़ा हो गया। कॉलेज ने नहीं जताई कोई आपत्ति
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी कॉलेज की ओर से कोई आपत्ति नहीं जताई गई। कॉलेज के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि सभी मूल दस्तावेज अगले ही दिन छात्रा को लौटा दिए जाएंगे, जबकि कॉलेज केवल दस्तावेजों की हस्ताक्षरित फोटोकॉपी रिकॉर्ड में रखेगा। हाईकोर्ट ने दी तत्काल राहत
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की सहमति को रिकॉर्ड पर लेते हुए छात्रा को राहत दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि काउंसलिंग जैसे महत्वपूर्ण अवसर में किसी छात्र के साथ दस्तावेजों को लेकर अनावश्यक बाधा स्वीकार्य नहीं है। कॉलेज ने छात्रा को अगले ही दिन सभी दस्तावेज लौटाने के लिए कोर्ट को आश्वस्त किया है।


