धीयां दी लोहड़ी… परिवार बोले- ‘यकीन है कि हर सुख-दुख में साथ निभाएंगी बेटियां’

आंचल चड्ढा | जालंधर पंजाब में उन परिवारों के लिए लोहड़ी और भी खास हो जाती है, जब उनके परिवार में जन्मी बेटियों या नवविवाहित जोड़ियों की वह पहली लोहड़ी हो। वह परिवार भी उतनी ही धूमधाम से आज लोहड़ी मना रहे हैं, जिनकी इकलौती संतान बेटी है। समय के साथ इस त्योहार को मनाने और लोगों की सोच में कई बदलाव आए हैं। पहले जब परिवार में बेटे का जन्म होता था तो लोहड़ी पर बड़े स्तर पर तैयारियां की जाती थीं। रिश्तेदारों और सगे-संबंधियों को बुलाकर धूमधाम से यह त्योहार मनाया जाता था। अब बेटियों की लोहड़ी भी उसी उत्साह और गर्व के साथ मनाते हैं। उन्हें ही इकलौती संतान मानकर उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प लेते हैं। इस लोहड़ी भास्कर ने ऐसे चार परिवारों से बात की, जिनकी संतान बेटियां हैं। सबने एकसुर में कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि बेटियां हर सुखदुख में उनका साथ निभाएंगी। इन परिवारों का कहना है कि लोहड़ी सिर्फ परंपरा निभाने का त्योहार नहीं, बल्कि सोच बदलने का भी मौका है। बेटियों को बराबरी का अधिकार देकर, उन्हें ही इकलौती संतान मानकर आगे बढ़ाना समाज को एक सकारात्मक दिशा दे सकता है। गुरदेव नगर के निवासी डाली और हरजिंदर की ढाई साल की इनायत एक बेटी है। उनका कहना है कि वे अपनी बेटी को दुनिया की हर खुशी देना चाहते हैं। समाज को लेकर उनका मानना है कि आज के समय में समाज काफी बदल चुका है और अब लोग बेटा-बेटी में कोई भेदभाव नहीं करते। इसी सोच के साथ वे अपनी बेटी की परवरिश बेटे की तरह ही कर रहे हैं। उन्होंने अपनी बेटी की पहली लोहड़ी बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाई। नीला महल निवासी सौमा जैन अपनी 10 साल की बेटी दिक्षिता को लेकर गर्व से कहती हैं कि वह उनकी इकलौती संतान है और वे उसी के सपनों को साकार करना चाहती हैं। सौमा जैन का कहना है कि आज भी कई बार लोग यह कह देते हैं कि ‘सिर्फ एक बेटी ही क्यों, एक बेटा भी होता तो अच्छा रहता।’ ऐसे में वह गर्व से जवाब देती हैं कि आज के समय में लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।

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