काशी में देवी अहिल्या की धरोहर मणिकर्णिका घाट ध्वस्त इंदौर में आक्रोश, कल बैठक में बनाएंगे विरोध की रणनीति

वाराणसी (काशी) में ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के एक हिस्से को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। इस घाट का निर्माण 1771 में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा कराया गया था। 1791 में देवी अहिल्याबाई ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था। ऐतिहासिक धरोहर के साथ ही मोक्ष, आस्था और सनातन परंपरा के जीवंत प्रतीक इस घाट को विकास के नाम पर धराशायी करने से समाज के विभिन्न वर्गों में नाराजगी है। वाराणसी प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर इंदौर में आक्रोश है। विरोध में धनगर समाज, पाल, बघेल समेत कई समाजों ने 15 जनवरी को बैठक प्रस्तावित है। इसमें रणनीति तय की जाएगी। समाज का कहना है कि अहिल्याबाई होलकर के त्रिशताब्दी वर्ष के समापन पर उनकी विरासत का ऐसा अनादर आहत करने वाला है। 84 प्रमुख घाटों में शामिल ढाई सौ वर्ष से ज्यादा प्राचीन मणिकर्णिका घाट काशी के 84 प्रमुख घाटों में शामिल है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी स्थान पर माता पार्वती की कर्णिका (कान की मणि) गिरी थी, जिससे इसका नाम मणिकर्णिका पड़ा। घाट पर पारंपरिक पत्थर की सीढ़ियां, धार्मिक प्रतीक व शिल्पकला के अवशेष मौजूद हैं। देवी अहिल्या ने यहां तीर्थ यात्रियों के लिए कई सुविधाएं विकसित कराई हैं। ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए एक्ट में कड़े प्रावधान हैं प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम (AMASR), 1958 ऐतिहासिक स्मारकों और स्थलों के संरक्षण के लिए प्रमुख कानून है। इस अधिनियम में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को राष्ट्रीय विरासत से जुड़े स्मारकों की सुरक्षा, संरक्षण और उनके आसपास होने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करने का अधिकार है। इसके तहत स्मारकों के चारों ओर 100 मीटर का प्रतिबंधित क्षेत्र और 200 मीटर का नियंत्रित क्षेत्र निर्धारित किया गया है, ताकि अनधिकृत निर्माण रोका जा सके। वर्ष 2010 के संशोधन में प्रतिबंधित क्षेत्रों में निर्माण पर रोक को और सख्त किया गया है। मणिकर्णिका घाट पर 21 मंदिर, धर्मशाला भी, यहां तोड़फोड़ दुखद है देवी अहिल्या के अच्छे कामों को इस तरह ध्वस्त किया जाना दुखद है। इस पर चर्चा होनी चाहिए। जिस घाट को ध्वस्त किया गया, वहां देवी अहिल्या ने 5 करोड़ से 21 मंदिर, धर्मशाला, अन्न क्षेत्र व स्नान घाट भी बनवाए हैं। इसका महत्व काशी विश्वनाथ से जुड़ा है।
– जफर अंसारी, इतिहासकार देवी अहिल्या की विरासत को सरकार सहेजे ^विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन देवी अहिल्याबाई होलकर की दूरदर्शिता और विरासत को सुरक्षित रखते हुए ही होने चाहिए थे। हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लापरवाही की जांच, दोषियों पर कार्रवाई, मूर्तियां ट्रस्ट को सौंपने और उनके पुनः प्रतिष्ठापन का आग्रह किया है।
– यशवंतराव होलकर, प्रेसीडेंट, खासगी देवी अहिल्याबाई होलकर चैरिटिज ट्रस्ट

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *