जयपुर | शहरी क्षेत्र में स्थित कृषि भूमि पर आवासीय दर से स्टांप ड्यूटी वसूली से जुड़े मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रमुख वित्त सचिव, आईजी स्टांप व कोटा उप-पंजीयक से जवाब देने के लिए कहा है। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा व जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश दुर्गा शंकर की याचिका पर दिया। मामले से जुड़े अधिवक्ता सिद्धार्थ बापना ने बताया कि प्रार्थी की कोटा में कृषि भूमि है और राजस्व रिकार्ड में भी यह कृषि भूमि ही है। सरकार भी इस जमीन पर कृषि दर से ही राजस्व की वसूली करती है। इस दौरान पिछले एक सितंबर को प्रार्थी ने इसे बेचने के लिए इकरारनामा किया था। इसमें इस भूमि को कृषि भूमि मानकर ही कीमत तय की गई और एक नवंबर, 2025 तक पूरी रकम भुगतान होने पर रजिस्ट्री कराना तय किया, लेकिन इस दौरान ही एक अक्टूबर को राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर कृषि भूमि की सीमा एक हजार वर्ग मीटर से बढ़ाकर दो हजार वर्ग मीटर कर दी। साथ ही इसे स्टांप ड्यूटी के लिए आवासीय भूमि के समान मान लिया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि यह फैसला संविधानिक प्रावधानों के खिलाफ है।


