पहली जल सुनवाई…:जांच में मिली गड़बड़ी, 49 में से 3 जगह क्लोरीन जीरो, निगम ने दर्ज की सिर्फ 1 शिकायत

इंदौर के भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से हुई मौत के बाद प्रदेशभर में शुरू की गई ‘जल सुनवाई’ के तहत भोपाल नगर निगम के 85 वार्डों में मंगलवार को पानी की जांच और शिकायतें दर्ज की गईं। इस दौरान 18 वार्डों से कुल 49 लोग अपने-अपने क्षेत्रों के पीने के पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए पहुंचे। निगम अमले द्वारा की गई प्राथमिक जांच में केवल एक स्थान जोन नंबर 12 के वार्ड 44 में गंदे पानी की शिकायत दर्ज की गई। जल सुनवाई के दौरान दैनिक भास्कर के संवाददाता भी कई वार्ड कार्यालयों में मौजूद रहे। जांच में तीन स्थानों पर पानी में क्लोरीन की मात्रा शून्य (0) पाई गई, हालांकि अन्य पैरामीटर सामान्य रहे। विशेषज्ञों के अनुसार क्लोरीन का शून्य होना इस बात का संकेत है कि पानी में बैक्टीरिया की आशंका हो सकती है। इंदौर के भागीरथपुरा मामले में भी फीकल कोलिफार्म और ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले थे। 1: रास्ता बना नाला, नीचे से गुजर रही ​है पानी की लाइन
जवाहर चौक स्थित सरस्वती नगर (वार्ड 32) में हाउसिंग बोर्ड ब्लॉक-6 के सामने का आम रास्ता लंबे समय से सफाई न होने के कारण नाले में तब्दील हो गया है। इसी नाले के नीचे से पीने के पानी की पाइप लाइन गुजर रही है, जिससे कभी भी पानी दूषित होने का खतरा बना हुआ है।
2: वार्ड 77 में सीवेज और पेयजल लाइन साथ-साथ बिछी मिली
वार्ड 77 के जैन नगर, देवकी नगर और पन्ना नगर में गंदे पानी की शिकायतें सामने आईं। रहवासियों रिंकू सैनी, कमरुनिशा, परमानंद और नंदनी कुशवाहा की शिकायतों के बाद सैंपल लिए गए। जांच में सामने आया कि इस वार्ड के कई इलाकों में सीवेज और पेयजल पाइप लाइनें साथ-साथ बिछी हुई हैं, जिससे दूषित पानी मिलने की आशंका बढ़ रही है। 3: लुंबिनी परिसर में बोरिंग के गंदे पानी की शिकायत
रिवेरा टाउनशिप के पास लुंबिनी परिसर में बोरिंग के पानी में गंदगी की शिकायत है। स्थानीय रहवासी अंकित सिंह ने बताया कि बोरिंग से पानी लेने पर शुरुआती 15 मिनट पानी फेंकना पड़ता है। हाउसिंग बोर्ड द्वारा लगाए गए नर्मदा लाइन के सार्वजनिक नलों से पानी साफ आ रहा है, लेकिन वहां भीड़ और समय की समस्या बनी हुई है। 18 वार्डों से आए 49 सैंपल – वार्ड 11 से 5, वार्ड 23 से 2, वार्ड 34 से 2, वार्ड 27 से 1, वार्ड 29 से 1, वार्ड 52 से 9, वार्ड 57 से 1, वार्ड 60 से 2, वार्ड 62 से 3, वार्ड 63 से 1, वार्ड 64 से 3, वार्ड 67 से 2, वार्ड 68 से 1, वार्ड 73 से 1, वार्ड 74 से 1, वार्ड 77 से 4, वार्ड 78 से 2 और वार्ड 1 से 1 सैंपल जांच के लिए लाए गए। तर्क- जहां क्लोरीन नहीं मिली, वहां जांच कराएंगे इंदौर की घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल सहित पूरे प्रदेश में प्रत्येक मंगलवार को जल सुनवाई आयोजित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सभी नगरीय निकायों में यह प्रक्रिया शुरू की गई है। भोपाल में हुई सुनवाई के दौरान वार्ड नंबर 8 के कार्यालय में भोईपुरा (बुधवारा) से एक महिला पानी का सैंपल लेकर पहुंचीं, जिसमें क्लोरीन 0 मिली। इसी तरह वार्ड नंबर 77 और 78 के सैंपलों में भी क्लोरीन की रीडिंग शून्य पाई गई। नगर निगम के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर उदित गर्ग ने बताया कि फिल्टर प्लांट पर पानी को बैक्टीरिया मुक्त करने के लिए क्लोरीन मिलाई जाती है और यह पानी सप्लाई के दौरान घरों तक पहुंचनी चाहिए। जिन स्थानों पर क्लोरीन नहीं मिली है, वहां विस्तृत बैक्टीरियोलॉजिकल जांच कराई जाएगी। सुनवाई के दौरान जोन- 12 के वार्ड 44 में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि नल चालू होने पर शुरुआत में गंदा पानी आता है। निगम अधिकारियों ने शिकायत दर्ज कर ली है। बुधवार को मौके पर जांच करेंगे।

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