प्रदेशभर में मकर संक्रांति को लेकर गजब का उत्साह देखा जा रहा है। कोटा में भी मकर सक्रांति पर जमकर पतंगबाजी की जाती है। वहीं दान पुण्य और मंदिरों में दर्शन में भी शहरवासी पीछे नहीं रहते। कोटा में बंगाली समाज के लोग सक्रांति पर मगरमच्छ की पूजा भी करते हैं। कोटा में बुधवार को सीएडी रोड स्थित दुर्गा बस्ती और आंवली में बंगाली समाज के लोगों ने मगरमच्छ की पूजा की। यहां रहने वाले बंगाली समाज के लोग इस दिन मगरमच्छ की प्रतिमा बनाते हैं। विधि विधान से उसकी पूजा की गई। मगरमच्छ को गंगा का वाहन माना जाता है। ऐसे में मकरध्वज के रूप में मगरमच्छ की पूजा का विधान वर्षों से चला आ रहा है। बंगाली समाज के लोगों का मानना है कि धरती पर मात्र मगरमच्छ ही एक ऐसा जीव है जो पानी और धरती दोनों पर समान रूप से रह सकता है। बंगाली समाज के लोगों ने बताया कि इससे जुड़ी हुई एक धारणा यह है कि एक व्यक्ति मिट्टी का मगरमच्छ बनाकर तांत्रिक के पास विद्या सीखने गया था। जब वह मकर संक्रांति पर घर लौटा तो उसके परिवार ने उससे पूछा कि उसने क्या सीखा। इस पर वह अपने परिवार को नदी के तट पर ले गया और वहां पर मिट्टी का मगरमच्छ बनाया और मंत्र बोलकर उसे जीवित किया। इसके बाद मगरमच्छ जीवित होकर नदी में चला गया। इसके बाद से ही लोग मकर संक्रांति पर मगरमच्छ की पूजा करते हैं। बंगाली समाज के लोगों ने बताया कि इसके अलावा गंगा जी का वाहक होने की वजह से भी मगरमच्छ को पूजा जाता है। बाजारों में पतंगों की दुकानों पर भीड़
वहीं सक्रांति पर सुबह से ही बाजारों में पतंग और मांझे की खरीददारी के लिए युवाओं की भीड़ लगी रही। रामपुरा, गुमानपुरा, सब्जीमंडी, केशवपुरा, नयापुरा समेत शहर के कई बाजारों में सुबह से ही लोग दुकानों पर पहुंचे। लोगों ने इस बार देसी मांझे को प्राथमिकता दी। वहीं अलग अलग क्वालिटी की पतंगे खरीदी गई।


