पटियाला में रैन बसेरों के बावजूद सड़क पर सो रहे:आधार कार्ड देखकर दी जा रही लोगों को एंट्री, सवाल-बेघर कहां से लाएं

नागरिकों के पैसों से गरीबों और प्रवासी मजदूरों के लिए रैन बसेरे बनाए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ सख्ती दिखाते हुए उन्हीं गरीब लोगों को कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। पटियाला में रैन बसेरों के बावजूद गरीब लोग सड़कों पर सोने को मजबूर हैं। खंडा चौक पर रैन बसेरे से मात्र 30 मीटर की दूरी पर कई लोग सड़क किनारे सोते हुए देखे गए। यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है कि आखिर क्यों जरूरतमंदों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस मामले पर नगर निगम पटियाला के मेयर की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। रैन बसेरों को लेकर अक्सर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं और जनता के टैक्स के पैसों से सुविधाएं स्थापित की जाती हैं। हालांकि, आधार कार्ड जैसी शर्तों के कारण कई जरूरतमंद लोग इन सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। जो लोग सड़क पर सोते हैं उनका आधार कार्ड किस पते पर बनेगा सवाल यह उठता है कि जिन लोगों का कोई स्थायी पता नहीं है और जो सड़कों पर रहते हैं, उनका आधार कार्ड किस पते पर बनेगा। उनकी पहचान कैसे सुनिश्चित की जाएगी? जब तक इन व्यावहारिक समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक रैन बसेरे केवल कागजी योजनाएं बनकर रह सकते हैं और जरूरतमंदों तक उनका लाभ नहीं पहुंच पाएगा। इन तश्वीरों से देखिए हालात

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