उदयपुर में मकर संक्रांति और एकादशी के पावन पर्व पर योग, अध्यात्म और सनातन संस्कृति का एक अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। गोवर्धन सागर रिंग रोड स्थित पन्नाधाय पार्क में आयोजित ‘विराट उत्तरायण अर्घ्य पर्व’ ने पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। इस भव्य आयोजन में सैकड़ों सनातनी श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर सामूहिक रूप से सूर्यदेव की आराधना की और विश्व शांति व लोक कल्याण की मंगल कामना की। 108 सूर्य नमस्कार से हुआ ऊर्जावान आगाज
कार्यक्रम की शुरुआत अलसुबह योग की शक्ति के साथ हुई। कार्यक्रम संयोजक पंकज सुखवाल ने बताया कि उत्सव का शुभारंभ 108 सूर्य नमस्कार के साथ किया गया, जिसमें युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। योग के माध्यम से शरीर और मन की शुद्धि के पश्चात, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ‘सूर्य पताका’ का आरोहण किया गया। केसरिया ध्वज के फहराते ही पूरा परिसर ‘जय सूर्यदेव’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। पावन नदियों के जल से 551 जोड़ों ने दिया अर्घ्य
इस उत्सव का सबसे मुख्य और आकर्षक केंद्र सामूहिक अर्घ्य दान रहा। देश की पांच पवित्र नदियों के पावन जल को विशेष रूप से इस अनुष्ठान के लिए मंगवाया गया था। मंत्रों की गूंज के बीच 551 जोड़ों ने एक साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। इस दौरान एकादशी का संयोग होने के कारण भगवान शिव को साक्षी मानकर विशेष पूजा-अर्चना भी की गई। परंपरा और आधुनिकता के इस मेल ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। समारोह में शहर की कई गणमान्य विभूतियों ने शिरकत की। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक (मावली) धर्मनारायण जोशी मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में मकर संक्रांति के आध्यात्मिक पक्ष के साथ-साथ इसके वैज्ञानिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सूर्य का उत्तरायण होना न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ है, बल्कि यह प्रकृति और स्वास्थ्य के लिए भी ऊर्जा का नया संचार लेकर आता है। कार्यक्रम में पूर्व नेता प्रतिपक्ष (नगर निगम) दिनेश श्रीमाली, पूर्व प्रधान (गिर्वा) तख्तसिंह शक्तावत, आलोक स्कूल के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमावत, विजय प्रकाश विप्लवी, अंबर मेनारिया (अखिल भारतीय ब्राह्मण परिषद) और पतंजलि की योगाचार्य अनीता पालीवाल भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने सनातन संस्कृति के संरक्षण और इस प्रकार के सामूहिक आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया।


