छतरपुर जिले के चरणपादुका सिंहपुर में मंगलवार, 14 जनवरी को अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। बुंदेलखंड के जलियांवाला बाग के रूप में पहचाने जाने वाले इस ऐतिहासिक स्थल पर 95वां श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया जा रहा है। 14 जनवरी 1931 को हुआ था भीषण नरसंहार यह श्रद्धांजलि समारोह 14 जनवरी 1931 की उस दर्दनाक घटना की याद में आयोजित किया जाता है, जब उर्मिल नदी के तट पर स्वाधीनता आंदोलनकारियों की एक सभा चल रही थी। अंग्रेजों के पॉलिटिकल एजेंट मिस्टर फिशर ने सभा को चारों ओर से घेरकर निहत्थे स्वतंत्रता सेनानियों पर गोलियां चलवा दी थीं। गोलीबारी में उर्मिल नदी का पानी खून से लाल हो गया था। गोलीबारी के बाद गांवों में लूट और आगजनी गोलीकांड के बाद अंग्रेजी हुकूमत ने आसपास के गांवों में लूटपाट की और कई घरों में आग लगा दी। इस क्रूर कार्रवाई में सेठ सुंदरलाल गुप्ता (गिलोहां), रघुराज सिंह कटिया, चिरकू मातों (गोमा), हल्कू कुर्मी (खिरवा) और गनेशा अहिरवार (लौंडी) शहीद हो गए। सरकारी रिकॉर्ड में 26 लोगों के घायल होने की पुष्टि है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए और कई अन्य शहीद हुए थे। 1978 में रखी गई स्मारक की आधारशिला चरणपादुका शहीद स्मारक की आधारशिला अप्रैल 1978 में तत्कालीन रक्षा मंत्री बाबू जगजीवन राम ने रखी थी। स्मारक का लोकार्पण 14 जनवरी 1984 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने किया था। ऐसे पड़ा चरणपादुका नाम किवदंती के अनुसार भगवान श्रीराम के अयोध्या से चित्रकूट गमन के दौरान उर्मिल नदी के किनारे एक विशाल शिला पर उनके युगल चरण चिन्ह अंकित हो गए थे। इसी आस्था के चलते सिंहपुर और आसपास के ग्रामीणों ने इस स्थल का चरण पूजन किया और इसका नाम चरणपादुका पड़ा।


