मकर संक्रांति के पावन अवसर पर खरगोन स्थित नवग्रह मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भगवान सूर्य नारायण एवं नवग्रह देवताओं के दर्शन के लिए दिनभर मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल बना रहा। इस अवसर पर मंदिर में 551 किलोग्राम गुड़-तिल के लड्डुओं का भोग अर्पित किया गया। 300 से अधिक पंडितों ने कराई सत्यनारायण कथा मकर संक्रांति के अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक आयोजन किए गए। करीब 300 से अधिक पंडितों द्वारा भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर दान-पुण्य किया। महाराष्ट्र और गुजरात से भी पहुंचे श्रद्धालु मंदिर प्रबंधन के अनुसार, मकर संक्रांति पर सीमावर्ती महाराष्ट्र, गुजरात सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचे। प्रबंधन ने एक दिन में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन करने की संभावना जताई है। सूर्य दर्शन से पूर्ण होती हैं मनोकामनाएं नवग्रह मंदिर को लेकर धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य नारायण के दर्शन करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। भक्त अमीषा गुजराती ने बताया कि यह देश का एक अनोखा मंदिर है, जिसकी विशेषता यह है कि सूर्य की पहली किरण सीधे भगवान सूर्य नारायण की प्रतिमा पर पड़ती है। सूर्य की पहली किरण का विशेष महत्व पंडित लोकेश जागीरदार ने बताया कि सूर्य देव की प्रतिमा पर सूर्य की पहली किरण का पड़ना अत्यंत शुभ माना जाता है। उन्होंने कहा कि सूर्य प्रधान इस नवग्रह मंदिर में दर्शन मात्र से ही भक्तों को नवग्रहों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। 250 वर्ष प्राचीन, ज्योतिषीय गणना पर निर्मित मंदिर पंडित जागीरदार के अनुसार, मंदिर के गर्भगृह में भगवान सूर्य नारायण के साथ मां बगलामुखी भी विराजमान हैं। यह मंदिर लगभग 250 वर्ष पुराना है और ज्योतिषीय गणना के आधार पर निर्मित किया गया है। इसी कारण मकर संक्रांति के दिन यहां दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।


