जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को कहा – लंबे समय बाद राजस्थान को एक ब्राह्मण बालक मुख्यमंत्री मिला है। मुख्यमंत्री और उनकी धर्मपत्नी दोनों धर्म आचरण वाले हैं और उनका राजनीतिक क्षितिज लंबे समय तक जगमगाएगा। कृष्ण दास परिहारी गलता गादी के अधिपति हैं और इस त्रिवेणी की सेवा का सौभाग्य आपको मिला है। व्यक्तिगत रूप से मैं बहुत प्रसन्न हूं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने आगे कहा- आपका राजनीतिक क्षितिज बहुत प्यारा है। सबको सब कहने दीजिए, आप मस्ती में काम कीजिए। इस सूक्त को ध्यान में रखिए – हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार। आपका मंगल होगा। जयपुर में सीकर रोड स्थित नींदड़ आवासीय योजना में 1008 कुण्डीय हनुमान महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार को जगद्गुरु रामभद्राचार्य का 77वां जन्मदिन मनाया गया। जन्मदिन महोत्सव में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपनी पत्नी के साथ पहुंचे थे। गलता तीर्थ को लेकर मुख्यमंत्री से बोले जगद्गुरु
रामभद्राचार्य ने कहा -मैंने यह सोचा था कि राजस्थान के मुख्यमंत्री कुछ अपूर्व घोषणा करेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इस पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपनी जगह से उठे और कहा – महाराज जी, वो तो आपने आदेश दे दिया है और वह हो भी गया है। आप चिंता मत करिए, गलता तीर्थ बिल्कुल आपने जो कहा है वही होगा। जयपुर में आप एक गौशाला और तुलसी पीठ की भी स्थापना करना चाहते हैं। महाराज जी, आप जो मन में ठान लेते हैं, वह तो राम की कृपा से अपने आप हो जाता है। चिंता करने की कोई बात नहीं है। रामलला के बाद अब काशी विश्वनाथ और मथुरा की बारी है
जन्मोत्सव में शामिल होने साध्वी ऋतम्भरा जयपुर पहुंचीं। उनके संबोधन के बाद रामभद्राचार्य बोले- 1984 के बाद राम जन्मभूमि का आंदोलन छिड़ा, जो संभावना की परिकल्पना था। जो तरंगों की झनक कृति उस समय ऋतम्भरा जी में थी। बहन और भाई के सामूहिक प्रयास से रामलला जी मिल गए हैं। अभी हमें काशी विश्वनाथ प्राप्त करना है। कृष्ण जन्मभूमि मथुरा प्राप्त करनी है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, जितना विश्वास ऋतम्भरा जी ने और आप लोगों ने मुझ पर किया है, जीवन भर उसे निभाता रहूंगा। लव जिहाद से हमारी बहनों की रक्षा नहीं हो जाती, तब तक विश्राम नहीं करूंगा
रामभद्राचार्य ने कहा- 76 साल मुझे हो गए हैं। 100 साल में 24 साल और बचे हैं, लेकिन काम बहुत करना है। अभी 25 साल मुझे और चाहिए। मुझे जिजीविषा है। मैं कुछ नहीं जानता, जब तक पाक अधिकृत कश्मीर हमको नहीं मिल जाता। जब तक प्रत्येक हिन्दू अपने अपमान का बदला लेने में सक्षम नहीं हो जाता। जब तक लव जिहाद की काल कूप से हमारी बहनों की रक्षा नहीं हो जाती, तब तक हम विश्राम नहीं लेंगे। आप सबको भी यही करना है। अब ओम शांति-शांति नहीं, ओम क्रांति-क्रांति का समय
रामभद्राचार्य ने कहा- मैं फिर कहने जा रहा हूं, ओम शांति-शांति तो बहुत सुन लिया। मेरा जन्म मकर संक्रांति को हुआ है। मेरा मन है कि अब ओम शांति-शांति वृद्धों का नारा हो गया है। अब हमें ओम क्रांति-क्रांति करना है। हम करेंगे। हिंदू अपने अपमान का बदला लेना जानता है
रामभद्राचार्य ने कहा- हिंदुओं के लिए ये शताब्दी वरदान सिद्ध होगी। इक्कीसवीं शताब्दी हिंदुओं की है। हमें साध्वी जैसी बहनों का अगर सहयोग रहा, तो जिस तरीके से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में आगे-आगे सुभद्रा चलती है, फिर जगन्नाथ। मुझे लगता है हिंदुओं की विजय रथ यात्रा में पहले साध्वी ऋतम्भरा चलेगी, फिर मैं। और एक बार फिर हम लोगों को दिखा सकेंगे कि हिन्दू अपने अपमान का बदला लेना जानता है। भूलकर भी न किसी को छेड़ेंगे हम, और छेड़ने पर किसी को न छोड़ेंगे हम
रामभद्राचार्य ने कहा- विगत 26 दिसंबर को एक ऐसी घटना हुई। एक हजार साल पहले महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर तोड़ा था। उसका जीर्णोद्धार हुआ, फिर टूटा, हमने बनाया। हम आप सबका आवाहन करते हैं कि अब कोई संकोच नहीं होगा। जहां-जहां हमारे मंदिर होंगे, वहां-वहां हम अपने अधिकार को स्वीकार करेंगे। कुछ भी हो जाए, अब हिन्दू किसी से नहीं डरेगा। भूलकर भी न किसी को छेड़ेंगे हम, और छेड़ने पर किसी को न छोड़ेंगे हम।


