छऊ नृत्य का संचालन व मुखौटा निर्माण तकनीक की जानकारी दी

भास्कर न्यूज | सरायकेला आचार्य छऊ नृत्य विचित्रा में मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल से आए अभिनय कला के कलाकारों की भ्रमणशील आवासीय कार्यशाला का समापन हुआ। कार्यशाला के अंतिम दिन नाट्य विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह कार्यशाला सरायकेला, झारखंड भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य शिक्षार्थियों को सरायकेला छऊ नृत्य एवं उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रू-ब-रू कराना था। आचार्य छऊ नृत्य विचित्रा के सह-निदेशक रंजीत आचार्य ने जानकारी देते हुए बताया कि विगत एक सप्ताह तक चली इस आवासीय कार्यशाला के दौरान मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय के अभिनय कला के कलाकारों को सरायकेला छऊ नृत्य की आंगिक संचालन पद्धति, मुखौटा निर्माण की तकनीक, स्थानीय संगीत, ताल-लय तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत की गहन जानकारी दी गई। इसके साथ ही शिक्षार्थियों को सरायकेला औरक आसपास के गांवों का भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्होंने आदिम जनजातीय समूहों के नृत्य और जीवन शैली को निकट से देखा। कार्यशाला के दौरान शिक्षार्थियों को सरायकेला, पुरुलिया और मयूरभंज शैली के छऊ नृत्य की विशेषताओं से भी अवगत कराया गया। अंतिम दिन सभी शिक्षार्थियों ने कार्यशाला में प्राप्त प्रशिक्षण के आधार पर मंचीय प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा। समापन समारोह में सरायकेला के नवपदस्थापित अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर जिले के कई गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी को शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया गया, जिसका दायित्व पद्मश्री शशधर आचार्य ने निभाया। उन्होंने सरायकेला छऊ नृत्य, उसके इतिहास, महत्व एवं कार्य क्षेत्र के बारे में विस्तृत जानकारी दी। गुरु पद्मश्री शशधर आचार्य, गुरु सुकांत आचार्य, गुरु नाथू महतो एवं गुरु दिलीप आचार्य के मार्गदर्शन में शिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। समापन अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी ने शिक्षार्थियों के साथ बैठक कर सरायकेला छऊ से जुड़ी विभिन्न बातों को साझा किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय के आनंद मिश्रा एवं हेमराज तिवारी भी उपस्थित रहे।

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