चुटिया निवासी संतोष कुमार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दो अधिकारियों पर मारपीट, जानलेवा हमला, गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस मामले में ईडी के सहायक निदेशक प्रतीक और सहायक शुभम को नामजद आरोपी बनाया गया है। संतोष पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के स्वर्णरेखा शीर्ष कार्य प्रमंडल रांची में शहरी जलापूर्ति योजना की राशि में से 20 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला करने के आरोपी हैं। पीएचईडी प्रमंडल रांची में कार्यरत कैशियर संतोष कुमार को पूर्व में रांची पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वर्तमान में वह जमानत पर जेल से बाहर हैं। घोटाले के इस मामले की जांच ईडी कर रहा है। इधर, संतोष की ओर से दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, संतोष को 12 जनवरी को सुबह 10 बजे ईडी कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश मोबाइल फोन पर दिया गया था। वह सुबह 9.45 बजे ईडी कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि अपराह्न करीब 1.35 बजे सहायक निदेशक प्रतीक ने उन्हें अपने कक्ष में बुलाया, जहां पहले से शुभम मौजूद थे। पूछताछ के दौरान उनसे आरोप स्वीकार करने का दबाव बनाया गया। मना करने पर दोनों अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई और गालियां दी गईं। आरोप नहीं स्वीकारने पर धमकी भी दी । पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कैशियर संतोष कुमार के विरुद्ध 18 दिसंबर 2023 में रांची के सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। उन पर आरोप था कि उन्होने मार्च 2020 में एलएंडटी कंपनी के फर्जी बिल के आधार पर 2.17 करोड़ रुपये को फर्जी खाते में हस्तांतरित कर लिया था। इसी केस के आधार पर ईडी ने ईसीआईआर दर्ज किया और अनुसंधान कर रही है। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि उनसे 16 जनवरी को दोबारा ईडी कार्यालय में उपस्थित होने से संबंधित आवेदन जबरन लिखवाया गया और रात 10.45 बजे तक उन्हें कार्यालय में रोके रखा गया, ताकि वे घटना की सूचना अपने परिवार, अधिवक्ता, थाना या मीडिया को न दे सकें। छोड़ते समय भी उन्हें और उनके परिवार को जेल भेजने की धमकी दी गई। इधर, एयरपोर्ट थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि दोनों ने डंडे से संतोष पर हमला किया और जान से मारने की नीयत से लगातार मारते हुए कहा कि अगर मर भी जाओगे तो हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मारपीट के कारण उनका सिर फट गया और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। संतोष कुमार का आरोप है कि अपराह्न करीब 2 बजे उन्हें सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड ले जाया गया, जहां सिर में छह टांके लगे। अस्पताल में भी उन्हें धमकाया गया कि डॉक्टर को चोट लगने की सच्चाई न बताएं, अन्यथा उन्हें और उनके परिवार को जेल भेज दिया जाएगा। प्राथमिकी के अनुसार, अस्पताल से लौटने के बाद उन्हें दोबारा ईडी कार्यालय ले जाया गया, जहां साक्ष्य मिटाने की नीयत से जबरन खून से सनी टी-शर्ट उतरवा कर नई टी-शर्ट पहनाई गई। आरोप है कि इसके बाद उनसे इंसिडेंट रिपोर्ट लिखे एक कागज पर जबरन हस्ताक्षर भी कराए गए, जिसे उन्हें पढ़ने तक नहीं दिया गया।


