गुरमीत लूथरा | अमृतसर माहनां सिंह रोड की गली चूहड़ सिंह में लोहड़ी के अलाव की चिंगारी से घर में लगी आग में बेटी दिव्यांग और पिता बुजुर्ग होने के कारण बाहर नहीं आ पाए। पोते सहजबीर सिंह ने बताया कि अगर दादा खजान सिंह (85) चंद सीढ़ियां चढ़कर पहली मंजिल तक भी पहुंच जाते तो शायद उनकी जान बच जाती। बुधवार रात अचानक आग लगने से धुआं फैल गया और कमरे में मौजूद दादा खजान सिंह न तो गेट तक पहुंच पाए और न ही सीढ़ियां चढ़कर पहली मंजिल पर जा पाए। आंखों की रोशनी कम होने के चलते गलती से कमरे के बाहर बने बाथरुम में जा पहुंचे तथा अंधेरा और धुआं होने के चलते वहीं गिर गए। जिस कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दिव्यांग बुआ नवदीप कौर उर्फ नैंसी भी नीचे कमरे में मौजूद थी जिसे आग के बारे में पता नहीं चला। आग की चपेट में आने से उनकी भी मौत हो गई। खजान सिंह की बहू गुरप्रीत कौर ने बताया कि बेटे सहजबीर सिंह, बेटी सीरत कौर, हरमनबीर कौर और पति मनप्रीत सिंह के साथ दूसरी मंजिल पर कमरों में ही बैठे थे कि अचानक हादसा हो गया। ससुर खजान सिंह और ननद नवदीप कौर उर्फ नैंसी (30) नीचे कमरे में मौजूद थे, उन्हें बचाने के लिए सभी नीचे की तरफ भागे लेकिन इससे पहले कि पहली मंजिल तक पहुंच पाते आग ने खजान सिंह और दिव्यांग ननद नैंसी को अपनी चपेट में ले लिया था। गुरप्रीत कौर ने बताया कि पति मनप्रीत सिंह का रुमाला साहिब बनाने और बेचने का होलसेल का काम है, रुमाला साहिब सिंथेटिक कपड़े से ही बनते हैं जिस कारण आग तेजी से फैली। गली 4-5 फुट होने के चलते फायर ब्रिगेड की गाड़ियों भी अंदर पहुंच नहीं पाई। गली के बाहर से ही पानी की पाइपें बड़ी मुश्किल से घटनास्थल पर पहुंचाई गई। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को आग पर काबू पाने में करीब 5 घंटे लगे। रात डेढ़ बजे के बाद ही आग पर काबू पाया जा सका लेकिन तब तक सबकुछ खाक हो चुका था। खजान सिंह और दिव्यांग नैंसी की जान नहीं बचाई जा सकी। पोस्टमार्टम के बाद बुधवार दोपहर बाद खजान सिंह और नैंसी का अंतिम संस्कार कर दिया गया।


