भास्कर न्यूज | अमृतसर खालसा यूनिवर्सिटी ने इंटरनेशनल कल्चरल फोरम के सहयोग से ‘विरासत-ए-पंजाब’ लोहड़ी महोत्सव का आयोजन किया। समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. रमिंदर कौर, विशिष्ट अतिथि डॉ. सुखबीर कौर माहल और अकादमिक डीन डॉ. सुरिंदर कौर ने ‘भुग्गा जलाने’ की रस्म के साथ किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉ. परमजीत सिंह कलसी, आयकर विभाग के सहायक निदेशक बजिंदर सिंह और समाजसेवी सतबीर सिंह सहित कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। डॉ. सुखबीर कौर माहल ने कहा कि लोहड़ी उत्तर भारत का एक ऐसा त्यौहार है जो लोगों को एकता के सूत्र में पिरोता है। उन्होंने मातृभाषा पर विशेष जोर देते हुए कहा “हर इंसान का अस्तित्व उसकी मातृभाषा में ही बसता है। मुख्य अतिथि डॉ. रमिंदर कौर ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि मानव समाज की शुरुआत महिला-केंद्रित थी। उन्होंने महिलाओं को स्वतंत्र सोच विकसित करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि जब तक महिलाएं अपने करियर और आजादी के असली मकसद को नहीं समझेंगी, तब तक पूर्ण सशक्तिकरण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि बेटियों के लिए लोहड़ी मनाना समाज में बराबरी लाने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है। डॉ. सुरिंदर कौर ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि आज के समय में समाज की सोच बदल रही है और अब लड़कों की तरह लड़कियों की लोहड़ी भी धूमधाम से मनाई जाती है कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पंजाबी लोक गीतों, गिद्दा और भंगड़ा की शानदार प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान जिला सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण अधिकारी, गुरदासपुर डॉ. किरतप्रीत कौर, गुरमिंदर कौर, रीना हंस, महकप्रीत सिंह, मलकप्रीत कौर के अलावा अन्य स्टाफ और छात्र मौजूद थे।


