भागीरथपुरा में दूषित पानी से लगातार मौतें हो रही हैं। अकसर लोग दूषित पानी के कारण होने वाली समस्या को पेट की बीमारी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर किडनी और लिवर पर होता है। दूषित पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया धीरे-धीरे शरीर के अन्य अंगों को चपेट में ले लेते हैं। कई बार ऑर्गन फेल्योर की स्थिति बन जाती है। एक्सपर्ट्स की संयुक्त राय है कि दूषित पानी केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि पूरे शरीर को धीरे-धीरे बीमार करने वाली समस्या है। शुरुआत उल्टी-दस्त से, फिर किडनी व लिवर तक पहुंच जाता है संक्रमण बच्चों पर असर ज्यादा खतरनाक
पीडियाट्रिशियन बताते हैं कि बच्चों का शरीर दूषित पानी के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है। बार-बार डायरिया से उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। वहीं फ्लोराइड और आर्सेनिक जैसे रसायन हड्डियों, दांतों और त्वचा को स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं। 27 मरीजों का अस्पताल में इलाज जारी, 8 आईसीयू में भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार क्षेत्र में संक्रमण के 3 नए मरीज सामने आए हैं। फिलहाल शहर के विभिन्न अस्पतालों में 27 मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनमें से 8 की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया है। अब तक 440 मरीज पहुंचे अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 24 दिसंबर से अब तक कुल 440 मरीजों को गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती कराया जा चुका है। राहत की बात यह है कि इनमें से 413 मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि नए मरीजों की संख्या में गिरावट आई है, लेकिन सतर्कता कम नहीं की गई है। स्वास्थ्य टीमें भागीरथपुरा में लगातार घर-घर सर्वे कर रही हैं। संदिग्ध मरीजों की मौके पर ही जांच कर ओआरएस और जरूरी दवाइयों का वितरण किया जा रहा है।


